मेट्रीमोनियल साइट के माध्यम से दोनों की 11 वर्ष पहले मुलाकात हुई थी। 28 नवंबर 2013 को दोनों की शादी बिना किसी दहेज के संपन्न हुई थी। इसके बाद पत्नी पीएचडी करने के लिए जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली में छह साल के लिए चली गई थीं।
पीएचडी करने के बाद अमेरिका के टेक्सास शहर में नौकरी कर रही महिला ने ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) में प्रबंधक के पद पर कार्यरत पति के साथ रहने से इन्कार कर दिया। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह ने वैवाहिक विच्छेद की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि वंश वृद्धि में कोई सहयोग नहीं करना पति के साथ पत्नी की मानसिक क्रूरता है। हाईकोर्ट के आदेश पर महिला का बयान अमेरिका और भारतीय दूतावास के सहयोग से ऑनलाइन हुआ था।
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ओएनजीसी में प्रबंधक की तरफ से मुकदमे की पैरवी करने वाले अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने बताया कि सुनवाई के दौरान महिला ने अमेरिका से ही अधिवक्ता के माध्यम से ऑनलाइन सुनवाई की अर्जी लगाई थी। परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी थी कि ऑनलाइन सुनवाई के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद महिला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर ऑनलाइन सुनवाई की गुहार लगाई।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि ऑनलाइन सुनवाई के लिए प्रर्याप्त व्यवस्था किया जाए। इसके बाद जिला कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई हुई थी। दोनों की संपन्न आर्थिक स्थिति और बिना दहेज की हुई शादी पर अदालत ने बिना किसी प्रतिकर के अलग रहने का आदेश दिया है।
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मैट्रिमोनियल साइट से मुलाकात के बाद हुई थी शादी
मनोज नागवंशी ने बताया कि वाराणसी निवासी सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक का बेटा क्रासिंग रिपब्लिक में रहता है। वह ओएनजीसी में प्रबंधक पद पर रहते हुए लगभग डेढ़ लाख रुपये प्रति महीने की तनख्वाह लेता है। मेट्रिमोनियल साइट के माध्यम से मोदीनगर निवासी युवती से 11 वर्ष पहले मुलाकात हुई थी। 28 नवंबर 2013 को दोनों की शादी बिना किसी दहेज के संपन्न हुई थी।
अमेरिका से पत्नी ने कहा, पति में कमी है, नहीं रहूंगी साथ
अदालत में बयान दर्ज कराते हुए महिला का कहना था कि पति के अंदर कमी है, इसलिए वंश वृद्धि नहीं हो सकती। जबकि पति का कहना था कि जिस विभाग में काम करता है वहां पर हर महीने स्वास्थ्य की जांच होती है, वह मानसिक व शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है।