कई साल इंतजार के बाद बने आयुष विभाग अब शासन की उपेक्षा का शिकार होने लगा है। छह माह पूर्व ही तीन कमरों में शुरू किए गए आयुष विभाग को अब मात्र एक कमरे में समेट दिया गया है। छह माह पूर्व ही आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिए अलग-अलग कमरे बने थे।
इसके अलावा दवाइयों के लिए अलग स्टोर होेने के साथ ही पर्ची काउंटर और दवा वितरण के लिए अलग जगह बनाई गई थी। अब तीनों चिकित्सकों को एक ही कमरे में शिफ्ट कर दिया गया।
एक कमरे में एआरटी सेंटर और दूसरे कमरे में ईएनटी स्पेशलिस्ट बैठने लगे हैं। इसके अलावा एआरटी सेंटर की दवाइयों को भी आयुष विभाग के स्टोर में रखा जाने लगा है। अब एक छोटे से कमरे में तीनों चिकित्सक और उनकी दवाइयां भी उसी कमरे में रखी जा रही हैं।
हालांकि होम्योपैथिक दवाएं अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन आयुर्वेदिक और यूनानी सभी दवाएं उपलब्ध हैं। यूनानी और आयुर्वेद के रोजाना सौ से अधिक मरीज आते हैं। इतने मरीजों को एक छोटे से कमरे में इलाज करने में चिकित्सकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में सीएमएस डॉ. जेके त्यागी का कहना है कि एआरटी सेंटर के लिए अलग से जगह नहीं थी, इसलिए इस विभाग में ही एआरटी सेंटर बनाया गया है।