लोकतंत्र के सम्मान में बुजुर्ग भी पीछे नहीं रहे। बुढ़ापे में हाथ-पांव ने भले ही साथ देना बंद कर दिया हो, लेकिन मतदान के प्रति उनके उत्साह को कम नहीं कर पाए। जिस शिद्दत से वह युवा अवस्था में मतदान करते थे, वैसे ही शनिवार को भी वोट डालने पहुंचे।
कविनगर के प्रतिष्ठा अपार्टमेंट निवासी साढ़े 92 साल के नवल किशोर मेहरोत्रा केडीबी स्कूल में बने बूथ पर वोट डालने पहुंचे। चलने में असमर्थ नवल किशोर परिजनों के साथ गाड़ी से मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे, यहां से उन्हें व्हील चेयर पर बैठाकर बूथ तक ले जाया गया।
नवल किशोर ने बताया कि युवा अवस्था से अब तक एक बार भी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने वोट न डाला हो।सेठ मुकुंदलाल इंटर कालेज में रेलवे से रिटायर 89 साल के अंबा लाल शर्मा भी वोट डालने पहुंचे। उम्र ज्यादा होने की वजह से वह चल पाने में असमर्थ थे, लेकिन बेटे और बूथ पर तैनात वालंटियर की मदद से वह बूथ तक पहुंचे।
संजय नगर के रामकृष्ण इंस्टीट्यूट, होली चाइल्ड स्कूल में भी कई बुजुर्ग मतदाता परिजनों के साथ मतदान करने पहुंचे। वहीं दिव्यांगों और बीमार लोगों में भी उत्साह ऐसा था कि मतदान का दिन आया तो वह अपनी कमजोरी को भूल गए और वोट देने पहुंच गए।
उनका कहना था कि पांच साल में एक दिन ऐसा अवसर आता है कि जब वह अपनी पसंद का जनप्रतिनिधि या सरकार को चुन सके। इस दिन मतदान न करना ऐसा है, जैसे अपने प्रदेश को लावारिस छोड़ दिया हो।