जहां एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम चल रही है। वहीं एक बार फिर ममता शर्मसार हो गई है। वसुंधरा सेक्टर-18 में नवजात बच्ची कूड़ेदान के पास पड़ी मिली है, उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सुपुर्द किया गया है।मंगलवार शाम करीब चार बजे वसुंधरा निवासी कविता ने पुलिस को सूचना दी कि कूड़ेदान के पास एक नवजात बच्ची पड़ी रो रही है।
पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बच्ची की हालात सामान्य होने के बाद पुलिस ने उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सुपुर्द कर दिया। सीओ इंदिरापुरम अतुल यादव ने बताया कि बच्ची के परिजनों की तलाश की जा रही है। प्रह्लाद गढ़ी में बड़ी संख्या में किराए पर लोग रहते हैं।
हो सकता है कि उनमें से किसी की बच्ची हो या फिर किसी और कालोनी के निवासी ने बच्ची को यहां पर लाकर फेंका हो। पुलिस मामले को लोकलाज से भी जोड़कर देख रही है। दूसरी तरफ, इस संबंध में जिला प्रोबेशन अधिकारी महेश कर्णपाल ने बताया कि बच्ची प्रीमैच्यौर है।
फिलहाल उसे आकांक्षा समिति की अध्यक्ष उपासना अरोड़ा के सहयोग से कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- पहले भी फेंकी गई हैं बच्चियां
- 30 दिसंबर 2014: श्यामपार्क में गली में पड़ी मिली बच्ची।
- 24 नवंबर 2014: पप्पू कालोनी के कब्रिस्तान में नवजात बच्ची का शव मिला
- करीब छह माह पहले जयपुरिया सनराइज ग्रीन में भी भ्रूण मिला था।
- क्या कहते हैं समाजशास्त्री
समाजशास्त्री गौतम मलिक कहते हैं कि अशिक्षित लोग अभी भी बेटा-बेटी का भेदभाव करने से नहीं चूक रहे। अशिक्षा ही इस प्रकार के कार्यकलापों का कारण बन रही है। लोगों को समझना चाहिए कि अब बेटा-बेटी समान हैं। ऐसे में बेटियों को कहीं भी कम आंकना गलत है।