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Ghaziabad News: पुलिसकर्मी बनकर कारोबारियों को ठगते थे...4 शातिर गिरफ्तार

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गाजियाबाद। कभी खुद को चौकी इंचार्ज तो कभी थाना प्रभारी बताकर कारोबारियों के साथ ठगी करने वाले गिरोह के चार बदमाशों को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरोह नंदग्राम के एक इलेक्ट्रानिक्स कारोबारी से दो एसी और एक से दो एलईडी टीवी ठग चुका था। दोनों बार डिलीवरी राजनगर एक्सटेंशन की एसडी ग्रैंड सोसायटी के बाहर कराई गई।
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पुलिस ने सोसायटी के बाहर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखकर बदमाशों की पहचान की और दबिश देकर गिरफ्तारी कर ली। उनके पास से दोनों एलईडी और दोनों एसी बरामद हो गए हैं। गिरफ्तार आरोपी मनीष कुमार निवासी सदननगर, आगरा, जसवीर सिंह उर्फ मोनू निवासी वेस्ट विनोदनगर, पूर्वी दिल्ली, तमीम अली निवासी ग्राम देहरा, धौलाना और दिलशाद निवासी मधुविहार दिल्ली हैं।
सहायक पुलिस आयुक्त पूनम मिश्रा ने बताया कि एक सटीक सूचना पर चारों को रेड एपल सोसायटी के पास स्थित खंडहर से पकड़ा गया। गिरोह के दो शातिर फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है। गिरोह के सरगना जसवीर सिंह उर्फ मोनू के खिलाफ दिल्ली में दो और बागपत में एक मुकदमा दर्ज है। जसवीर के खिलाफ दिल्ली के अशोकनगर में अवैध हथियार रखने, दुष्कर्म का प्रयास और बागपत के बलैनी थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है।
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नोएडा, दिल्ली और बागपत में भी की वारदात
एसीपी ने बताया कि इस गिरोह ने नौ महीने पहले ही इस तरह ठगी करना शुरू किया। गिरोह के शातिर खुद को पुलिसवाला बताकर काॅल करके सामान मंगाते हैं और फिर उस सामान को लेकर भाग जाते हैं। गाजियाबाद के अलावा गिरोह ने दिल्ली, नोएडा और बागपत में इस तरह की वारदात की हैं। गिरोह ज्यादातर एसी और एलईडी टीवी ही मंगाता है। इन सामान को सस्ते दाम में बेच देता है। गिरोह के पास से कुल चार एलईडी टीवी मिले हैं। दो गाजियाबाद के बाहर ठगे गए।



ऐसे करते हैं वारदात
गिरोह का सरगना जसवीर खुद को कभी चौकी इंचार्ज तो कभी थाना प्रभारी बताकर इलेक्ट्रानिक्स कारोबारी को काॅल करता है। घर में कार्यक्रम बताकर एसी या एलईडी का आर्डर देता है।
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सामान की डिलीवरी के लिए पता बताया जाता है। गाजियाबाद में दो घटनाएं कीं। दोनों में राजनगर एक्सटेंशन की एसजी ग्रैंड सोसायटी के बाहर सामान मंगाया गया।
सामान के भुगतान के लिए चौकी या थाना आने के लिए कहा जाता है। दुकानदार बताए गए पते पर सामान भेज देता है तो गिरोह के शातिर सामान लेकर चले जाते हैं।
इसके बाद दुकानदार का कर्मचारी बिल लेकर बताए गए थाने या चौकी पर जाता है तो पता चलता है कि वहां से कोई काॅल ही नहीं की गई।
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