उत्तराखंड के पहाड़ों में झमाझम बारिश और बिजनौर बैराज से पानी छोड़ने का क्रम जारी है। इसके चलते गंगा में उफान बढ़ रहा है। इस कारण बृजघाट खादर इलाके में रहने वाले हजारों परिवारों मैं बेचैनी बढ़ती जा रही है।
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मानसून का आगमन हुए बिना ही खादर इलाके में रहने वाले हजारों परिवारों को अभी से ही गंगा नदी में बाढ़ आने की आशंका का डर सताने लगा है। उत्तराखंड के पहाड़ों में पहले ग्लेशियर पिघलने और अब कई दिनों से झमाझम बारिश होने के कारण गंगा के जलस्तर में लगातार इजाफा होता जा रहा है।
पहाड़ों से जुड़े बांधों में पानी की मात्रा बढ़ने से बिजनौर बैराज से हजारों क्यूसेक पानी छोड़ने का कम भी निरंतर चल रहा है। पहाड़ों की बारिश से बृजघाट के खादर क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों में अजीब सी बेचैनी बढ़ती जा रही है।
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इन परिवारों को यह डर भी सता रहा है कि मानसून का आगमन होने पर जब हर तरफ झमाझम बारिश का क्रम शुरू हो जाएगा तो उस समय गंगा नदी में उफान बढ़ने से हर साल की तरह फिर से बाढ़ की स्थिति से जूझना पड़ेगा।
गा में उफान बढ़ने से फसल बर्बाद
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष इंद्रजीत सोलंकी का कहना है कि पहाड़ों की बारिश और बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा में उफान बढ़ने से खादर क्षेत्र के निचले जंगल में सैकड़ों बीघा फसल में बर्बादी हो रही है।
197-84 मीटर के निशान पर पहुंचा जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी आबाद आलम का कहना है कि गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का क्रम जारी है। बुधवार की दोपहर को जलस्तर बढ़कर तल से 197-84 मीटर के निशान पर पहुंच चुका है।