ढाई लाख की दी मदद
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशासन की ओर से परिवार को तत्काल ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री विवेक राहत कोष से भी आगे मदद दी जाएगी। परिवार की आजीविका को ध्यान में रखते हुए उन्हें रोजगार के लिए एक दुकान आवंटित करने की भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दरअसल, इस पूरे मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया था। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन को परिवार की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए।
सीमित आय में बेटे के लिए किया संघर्ष
अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 1989 से 2021 तक दिल्ली में आईजीआई एयरपोर्ट स्थित एक होटल में नौकरी की। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सीमित पेंशन मिलती है। बताया गया कि पेंशन से गुजारा मुश्किल होने के कारण वह खाद्य सामग्री बनाकर बेचते हैं और उसी आय से परिवार का खर्च व बेटे हरीश के इलाज का खर्च उठाते रहे। मुलाकात के दौरान अधिकारियों ने उन्हें स्वरोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और भविष्य में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।