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Ghaziabad News: डीएमई पर खड़े ट्रक में भिड़ीं दो बाइकें, दो कांवड़ियों की मौत

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कौशांबी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर यूपी गेट के पास बुधवार सुबह सड़क पर खड़े खराब ट्रक से दो बाइकें टकरा गईं। दोनों बाइकों पर सवार चार कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल लेकर गुरुग्राम लौट रहे थे। हादसे में आगे चल रही बाइक पर सवार प्रिंस (17) और कृष्णा (16) की मौत हो गई, जबकि दूसरी बाइक पर सवार सौरभ (18) और आकाश (18) घायल हो गए। आकाश की हालत गंभीर है और उसका एमएमजी अस्पताल के आईसीयू में उपचार चल रहा है। पुलिस ने ट्रक कब्जे में लेकर चालक की तलाश शुरू कर दी है।
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पुलिस के अनुसार, गुरुग्राम के सेक्टर-20 में हनुमान मंदिर के पास रहने वाले सौरभ ने बताया कि वह अपने दोस्त आकाश निवासी रक्सौल, मोतिहारी (बिहार), प्रिंस निवासी बेतिया, गोपालपुर (बिहार) और कृष्णा निवासी गोरखा (नेपाल) के साथ 15 अगस्त को हरिद्वार कांवड़ लेने गए थे।
सौरभ के मुताबिक, चारों ने देर रात हरकी पौड़ी से गंगाजल लिया और दो बाइकों पर डीएमई से गुरुग्राम के ओम विहार लौट रहे थे। एक बाइक प्रिंस चला रहा था, जिस पर कृष्णा भी सवार था। दूसरी बाइक आकाश चला रहा था और सौरभ पीछे बैठा था।
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सुबह करीब छह बजे यूपी गेट के पास सड़क पर दूध कंपनी का खराब ट्रक खड़ा था। अंधेरे में उन्हें लगा कि ट्रक चल रहा है। आगे चल रही बाइक सीधे ट्रक से जा भिड़ी। प्रिंस और कृष्णा सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। आकाश ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी बाइक भी ट्रक से टकरा गई। पुलिस के मुताबिक, प्रिंस की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कृष्णा ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
हेलमेट होता तो शायद बच जाती दोनों की जान
हादसे में प्रिंस और कृष्णा के सिर पर गंभीर चोट आई। पुलिस के मुताबिक, दोनों बाइकों पर सवार चारों कांवड़ियों ने हेलमेट नहीं लगाया था। पुलिस का कहना है कि हेलमेट पहना होता तो दोनों की जान बच सकती थी।

समय पर मदद नहीं मिलने का आरोप

सौरभ ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद एक राहगीर ने बिना वाहन रोके ही एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी। उसके मुताबिक, सूचना के करीब 40 मिनट बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची। उसमें डॉक्टर या कंपाउंडर नहीं था। चालक और उसका सहयोगी घायलों को लेकर पहले निजी अस्पताल पहुंचे। दूसरी एंबुलेंस प्रिंस को लेकर अस्पताल पहुंची। सौरभ का आरोप है कि एंबुलेंस के पहुंचने तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी। उनका कहना है कि समय पर मदद मिलती तो शायद उसके दोनों दोस्तों की जान बच सकती थी।
डीएमई पर हादसों का सिलसिला, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
डीएमई पर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में खड़े वाहनों और भारी वाहनों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन एक्सप्रेसवे पर सड़क किनारे खड़े खराब वाहनों को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं बन सकी है।

डीएमई पर हाल में हुए प्रमुख हादसे

- 13 अगस्त 2026, लालकुआं: यू-टर्न ले रहे कैंटर से पुलिस टीम की स्कॉर्पियो टकराने में सब इंस्पेक्टर उपेंद्र समेत दो लोगों की मौत हुई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
- 16 अगस्त 2026, भोजपुर: हवा-हवाई होटल के पास ईंटों से भरे ट्रक ने कांवड़ियों के जत्थे को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक कांवड़िया गंभीर रूप से घायल हुआ था।

- 19 अप्रैल 2026, विजयनगर: आईपीईएम कॉलेज के पास कैंटर ने थार और वहां खड़े लोगों को टक्कर मार दी थी। हादसे में तीन लोगों की मौत हुई थी।
- 12 जून 2026, हिंडन नदी पुल: सड़क किनारे खड़े दुर्घटनाग्रस्त डंपर में पीछे से तेज रफ्तार कैंटर घुस गया था। हादसे में कैंटर चालक की मौत हुई थी।

- 14 दिसंबर 2025, वेव सिटी: घने कोहरे में डीएमई और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर 11 वाहन टकरा गए थे। हादसे में चार लोग घायल हुए थे।
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एमसीडी टोल प्लाजा के चलते भारी वाहनों का जमावड़ा रहता है। उन्हें रोकने और डीएमई पर बाइकों को नियंत्रित करने के लिए एनएचएआई की ओर से कार्रवाई की जा रही है। हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
-अरविंद कुमार, परियोजना अधिकारी, एनएचएआई

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दोनों कांवड़ियों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए हैं। घायलों का इलाज चल रहा है। परिजनों की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ट्रक कब्जे में ले लिया गया है। आरोपी चालक की तलाश की जा रही है।
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-सूर्यबली मौर्य, एसीपी इंदिरापुरम
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