गाजियाबाद। लखनऊ में आग की घटना में 15 छात्रों की मौत के बाद जिले में कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई के नाम पर की गई कवायद दो महीने बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी है। जीडीए ने जिले में 67 कोचिंग सेंटरों को दो महीने के भीतर मानक पूरे कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। आठ सिंतबर को यह समयसीमा पूरी हो गई, लेकिन किसी भी कोचिंग सेंटर ने जीडीए को मानक पूरे करने की जानकारी नहीं दी है।
जीडीए के सचिव विवेक मिश्र ने बताया कि अभी तक किसी कोचिंग सेंटर की तरफ से मानक पूरे करने के संबंध में जानकारी नहीं दी गई है। दो महीने की समयसीमा पूरी हो चुकी है। अब इस संबंध में जांच शुरू कर सेंटर संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
अग्निशमन विभाग के पास सिर्फ चार आवेदन पहुंचे
जीडीए ने सभी कोचिंग संचालकों को संसाधन दुरुस्त करने के साथ अग्निशमन विभाग की एनओसी लेने के निर्देश दिए थे। दूसरी तरफ, सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि एक मंजिल पर चल रहे संस्थानों को फायर एनओसी देने का प्रावधान नहीं है। पूरे भवन के पास एनओसी है तो संस्थान अपने संसाधन दुरुस्त कर सूचना देकर मंजूरी ले सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह के चार मामले विभाग के पास आए हैं और इनकी जांच की जा रही है।
मानक पूरे किए, लेकिन भवन की एनओसी नहीं
कोचिंग सेंटर संचालक भी नियमों के बीच फंसे हैं। नाम न बताने की शर्त पर गोविंदपुरम के एक कोचिंग संचालक ने बताया कि उनका सेंटर पहली मंजिल पर है। उन्होंने सेंटर में सभी जरूरी संसाधन लगा दिए हैं। जानकारी करने पर पता चला कि पूरी बिल्डिंग के पास एनओसी नहीं है। इस कारण उनके सेंटर को भी मंजूरी नहीं मिल रही है। संचालक का कहना है कि शहर के बहुत से भवनों में आपदा निकास की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उपलब्ध स्थान पर ही कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। अब सवाल यह है कि ऐसा भवन कहां तलाशें, जहां सभी नियमों और मानकों का पालन हो सके।
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यह है मामला
लखनऊ के अलीगंज में 23 जून को एक भवन में आग लगने के बाद वहां कोचिंग और एनीमेशन कोर्स के लिए 15 छात्रों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने अग्निशमन विभाग के साथ मिलकर जिले भर में अभियान चलाकर 67 कोचिंग सेंटरों को मानक के अनुरूप नहीं चलने पर सील किया था। इसके बाद कुछ अभिभावकों और संचालकों ने पढ़ाई प्रभावित होने की बात कर कोचिंग सेंटर खोलने की अपील की थी। इसके बाद 8 जुलाई को प्राधिकरण ने दो महीने में आग हादसे से बचाव की व्यवस्था कर अग्निशमन विभाग से एनओसी और आपात निकास की व्यवस्था कर दो महीने में जानकारी देने के लिए कहा था। हालांकि समय सीमा के पूरा होने के बाद किसी ने यह रिपोर्ट प्राधिकरण को नहीं दी है।