गाजियाबाद। रेलवे स्टेशन के यार्ड से ट्रॉलीमैन व गैंगमैन ने कबाड़ियाें की मिलीभगत से न सिर्फ यार्ड से रेलवे का लाखों की कीमत का लोहा चोरी कराया बल्कि उसको छिपाने के लिए कबाड़ियों को जगह भी उपलब्ध कराई। कबाड़ी कटर के जरिये लोहे के छोटे छोटे टुकड़े कर उनको बेचने की फिराक में थे, तभी आरपीएफ की टीम ने उनको रंगेहाथ पकड़ लिया।
मामला सामने आने पर विजयनगर भीमनगर निवासी ट्रॉलीमैन प्रवीण कैन, गैंगमैन सुरेंद्र को निलंबित कर दोनों के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है। आरपीएफ की टीम दोनों से पूछताछ कर रही है। जबकि, कबाड़ी फरमान निवासी सराय नजर अली उसके साथी निखिल व मोहम्मद इमरान निवासी कैला भट्ठा को आरपीएफ की टीम ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको जेल भेज दिया गया। आरपीएफ के सहायक आयुक्त एसएस गबरियाल ने बताया कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच चल रही है। उनको भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
कबूली मिलीभगत की बात, बांटा जाना था हिस्सा :
गिरफ्तार किए गए कबाड़ी फरमान ने घटना को अंजाम देने की बात कबूलते हुए बताया कि ट्रॉलीमैन प्रवीण कैन व गैंगमैन सुरेंद्र से उसका परिचय तीन साल पहले हुआ था। तब वह एक स्क्रैप कारोबारी के साथ यार्ड में लोहा देखने के लिए गया था। इसके बाद सुरेंद्र व प्रवीण उसको समय-समय पर लोहा बेचने के लिए बुलाते थे। 18 मार्च को भी प्रवीण व सुरेंद्र ने उनको लोहा चोरी करने के लिए बुलाया था। लोहे के टुकड़े बड़े थे, इसलिए तय हुआ कि पहले उनको यार्ड से चोरी करके स्टोर में रख लेते हैं, फिर उनको थोड़ा-थोड़ा करके बेच लिया जाएगा। स्टोर में रखने की व्यवस्था भी प्रवीण व सुरेंद्र ने ही कराई थी। तय हुआ था जितनी भी कीमत में लोहा बिकेगा, उसका 30 फीसदी प्रवीण व सुरेंद्र रखेंगे बाकी फरमान व उसके साथियों में बांटा जाएगा।
पुलिस ने जुटाए साक्ष्य : आरपीएफ ने यार्ड, स्टोर रूम, रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। उनकी लोकेशन भी निकाली गई है। सभी के चेहरे सीसीटीवी में भी साफ दिख रहे हैं। अब आरपीएफ कैंटर, रिक्शा, उनके चालकों की तलाश में जुटी है। उनके नाम भी घटना में शामिल किए गए हैं। गिरफ्तारी के लिए आरपीएफ की टीम दबिश दे रही है। यह भी जांच कराई जा रही कि जिस दिन लोहा चोरी हुआ, उस दिन कौन-कौन अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी पर थे, उनकी संलिप्तता इस घटना में है या नहीं।
-पहली बार नहीं घटना : नवंबर 2023 में रेलवे का लोहा चोरी करने के मामले में सीनियर सेक्शन इंजीनियर आरपी मीना, स्टोर इंचार्ज टीआर मीना, ठेकेदार असगर समेत 10 लोगों को आरपीएफ ने गिरफ्तार किया था। इन्होंने कैंटर में 30 की बजाय 40 क्विंटल लोहा भर लिया था और उसको बेचने के लिए जा रहे थे। घटना कैमरे में कैद न हो, इसके लिए कैंटर की नंबर प्लेट भी बदल दी गई थी।