कौशांबी। मानकों को पूरा करने वाले बडे़ निजी अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज बनाए जाने की योजना है। देश में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार नियमों में कई अहम बदलाव करने जा रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कौशांबी में इसकी पुष्टि की।
वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे अग्रणी देश माना जाता है, मगर वहां के अस्पतालों में बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर कार्यरत हैं। भारत से डॉक्टर दूसरे देशों में जाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि भारत में सरकारी ही नहीं बल्कि निजी अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी है।
इस कमी को दूर करने के लिए सभी बड़े अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेज भी बनाने पर विचार किया जा रहा है। निजी अस्पतालों के प्रबंधन से बात कर मेडिकल कॉलेज स्थापित करवाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इलाज का खर्च कम करने के लिए देश में ही नई दवाओं का बनना जरूरी है। इस दौरान यशोदा अस्पताल की सीईओ उपासना अरोड़ा ने घोषणा की कि अगर नए नियम लागू होते हैं तो वे कौशांबी में अस्पताल के साथ मेडिकल कालेज भी खोलेंगे।
हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति लोगों का कम रुझान बहुत बड़ी समस्या है। लोगों को जागरूक करना होगा। शुक्रवार को यह बातें केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहीं।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को यशोदा अस्पताल के टिरशिरी केयर सेंटर का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सा के क्षेत्र में प्राइवेट अस्पतालों का अहम योगदान है। प्राइवेट अस्पतालों ने न सिर्फ सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों का बोझ कम किया है, बल्कि नवीनतम चिकित्सा तकनीक देश में लाने में भी अहम भूमिका निभाई है। हालांकि महंगा इलाज और डॉक्टरों की कमी प्राइवेट अस्पतालों के लिए भी चुनौती है। वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित देशों में हर व्यक्ति हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर है, मगर यहां के लोगों का रुझान अभी इस ओर कम है।
ऐसे में लोगों को जागरूक करना होगा। उन्होंने यशोदा अस्पताल के एमडी पीएन अरोड़ा को अस्पताल के एक्सपेंशन के लिए बधाई दी। इस दौरान अस्पताल के चेयरमैन डा. दिनेश अरोड़ा, डा. शशि अरोड़ा, डा. रजत अरोड़ा, डा. गौरी अग्रवाल, उपासना अरोड़ा, डा. सुनील डागर आदि लोग मौजूद रहे।