फास्टैग के विरोध में आए ट्रांसपोर्टर, समय बढ़ाने की मांग
गाजियाबाद। वाहनों पर फास्टैग लगाए जाने की कवायद के बीच ट्रांसपोर्टर ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। गाजियाबाद महानगर गुड्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने इसकी समय सीमा बढ़ाए जाने की मांग की है। 15 दिसंबर की रात से अनिवार्य हुए फास्टैग का असर उद्योगों पर भी दिखने लगा है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि फास्टैग लागू होने के बाद किसी तरह का भाड़ा नहीं बढ़ाया गया है लेकिन दोगुने टैक्स से बचने के लिए कुछ जगह ट्रांसपोर्टर माल नहीं उठा रहे हैं।
गाजियाबाद में करीब 450 छोटे-बड़े ट्रांसपोर्टर हैं। लगभग 1500 मालवाहक वाहनों के साथ ट्रांसपोर्टर काम कर रहे हैं। दोगुना टोल टैक्स दिए जाने से उनमें नाराजगी है। उनका कहना है कि समय कम मिल पाने के चलते सभी गाड़ियों पर फास्टैग नहीं लग सके हैं। ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जिले में संचालित 250 से 300 ही वाहनों पर फास्टैग लगा है जबकि अन्य वाहन स्वामी अभी तक टैक लगवाने के लिए भटक रहे हैं। सरकार ने बिना पूरी तैयारी के व्यवस्था को जबरन लागू किया है। टोल नाकों तक पर व्यावसायिक वाहनों के टैग उपलब्ध नहीं हैं। एसोसिएशन ने इसके अनिवार्यता की समय सीमा बढ़ाए जाने की मांग की है।
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टोल पर चक्कर लगा रहे हैं वाहन मालिक
छीजारसी स्थित टोल पर फास्टैग लगवाने के लिए व्यावसायिक वाहनों के मालिक और ड्राइवर चक्कर काट रहे हैं लेकिन वहां पिछले दो सप्ताह से ज्यादा समय से व्यावसायिक वाहनों को जारी किए जाने वाले टैग उपलब्ध नहीं हैं। अजय पाठक, अध्यक्ष
गाजियाबाद महानगर गुड्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन
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आधी अधूरी तैयारियों के बीच नई व्यवस्था लागू करने से सब परेशान भी होते हैं और भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। छिजारसी के अलावा बील अकबरपुर टोल पर भी फास्टैग नहीं मिल रहा।
आशीष मैत्रेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष