सामाजिक सहभागिता और जागरूकता से लगेगी प्रदूषण पर लगाम
गाजियाबाद। प्रदूषण पर प्रहार के लिए युवा उद्यमियों, डॉक्टर, प्रोफेसर्स और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने अमर उजाला बिजनेस, एकेडमिक एंड सोशल आंत्रप्रेन्योर्स मीट-2019 (बेस) में भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन किया। ‘प्रदूषण से सांसों पर संकट : नागरिक एवं शासकीय संस्थाओं की भूमिका’ विषय पर राय रखते हुए युवा वक्ताओं ने सरकारी तंत्र को मजबूत बनाने के साथ सामाजिक सहभागिता और जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। बेस में युवा उद्यमियों ने सरकार से ग्रीन इंडस्ट्रीज और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की बात कही तो डॉक्टरों ने अपने घरों से ही जागरूता अभियान शुरू करने का मंत्र दिया। मीट में युवाओं ने सामाजिक सहभागिता के साथ प्रदूषण पर रोक लगाने का संकल्प लिया।
मीट में विभिन्न क्षेत्रों से आए युवाओं ने प्रदूषण पर लगाम लगाने को शहर की लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को प्रभावी बनाने, सीएनजी वाहनों को प्रोत्साहित करने, पराली के उचित निस्तारण करने और नियमित जागरूकता ड्राइव चलाने की बात कही। युवाओं के साथ बच्चों को प्रदूषण के प्रभावों से अवगत कराने के लिए कैरिकुलम में एक चैप्टर को शामिल करने, निगरानी के लिए काबिल स्टाफ की नियुक्ति करने और वायु के साथ जल प्रदूषण को रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने का सुझाव दिया।
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कोट्स...
ग्रीन इंडस्ट्रीज व सौर ऊर्जा को और मिले बढ़ावा
वायु प्रदूषण में डीजल वाहनों व कोयले का बड़ा योगदान है। सरकार को ग्रीन उद्योगों के विकास और सौर ऊर्जा को और बढ़ावा देने की जरूरत है। प्रदूषण को कम करने के लिए बच्चों को सही शिक्षा व लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। - अभिषेक गुप्ता, उद्यमी, आयन एंड स्टील इंडस्ट्री
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जागरूकता को चले नियमित ड्राइव
प्रदूषण सबसे बड़ी संख्या बन गई है। इसके लिए बच्चों को शिक्षित और लोगों को जागरूक करने के लिए ड्राइव चलाए जाने की जरूरत है। पॉलिथीन इस्तेमाल करने और प्रदूषण फैलाने वालों पर पहले के कानूनों से ही प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। - सचिन सैन, सिविल सर्विसेज अभ्यर्थी
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शहर से दूर बसाई जाएं औद्योगिक इकाइयां
महानगर के सभी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र अब शहर के बीचोंबीच आ गए हैं। उद्योगों की चिमनियों और वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। ऐसे में औद्योगिक इकाईयों को आवासीय क्षेत्रों से दूर बसाए जाने की जरूरत है। - अंकित कुमार, सिविल सर्विसेज अभ्यर्थी
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सामाजिक सहभागिता से चलाएंगे अभियान
बढ़ते प्रदूषण को सामाजिक सहभागिता से ही कम किया जा सकता है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कार पुलिंग करने, सीएनजी का इस्तेमाल करने और अपने आसपास पौधे लगाने, साइकिल चलाने के साथ पानी का छिड़काव करने से अभियान से जुड़ा जा सकता है। - वासुदेव गुप्ता, उद्यमी, फेब्रिकेशन एंड इंटीरियर इंडस्ट्री
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घर से करें जागरूकता की शुरुआत
गाड़ियों की बढ़ती संख्या और उससे निकलने वाले धुएं का वायु प्रदूषण में बड़ा रोल है। प्रदूषण की रोकथाम की शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी। बच्चों को प्रदूषण के बारे में बताने और बड़ों को रोकथाम के उपायों को अपनाने की जानकारी देना जरूरी है। - डॉ. चारू बंसल, स्किन स्पेशलिस्ट
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सरकार के साथ हर नागरिक निभाए दायित्व
प्रदूषण को नियंत्रित करने में जितनी जिम्मेदारी सरकार की है, उतनी जिम्मेदारी हर एक नागरिक की है। हर आदमी अगर प्रदूषण की रोकथाम का प्रयास करेगा तो उसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। सरकार को पौधरोपण व अन्य अभियानों में लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। - डॉ. अंशुल वार्ष्णेय, फिजिशियन
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जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की तय हो जवाबदेही
पौधरोपण से अधिक बड़ा दायित्व उनकी देखभाल का है। चाहे एक पौधा भी लगाएं लेकिन उसकी जिम्मेदारी जरूर लें। प्रदूषण रोकने का जिनके पास जिम्मा है, उन सरकारी विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी जरूरी है। वायु के साथ जल प्रदूषण को कम करने की जरूरत है। - पवन पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर, आरकेजीआईटी
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बहुमंजिला भवनों पर लगें पानी के स्प्रिंकल
वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण में बड़ा रोल निभा रहा है। लोगों को कार पुलिंग को बढ़ावा देने के साथ आसपास आने-जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, बहुमंजिला सरकारी व प्राइवेट बिल्डिंगों पर पानी के छिड़काव के लिए स्प्रिंकल लगाए जाने की जरूरत है। - प्रवीन कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, आरकेजीआईटी
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पराली से खाद बनाने की योजना को मिले प्रोत्साहन
पराली को लेकर पहले से बंदोबस्त करने की जरूरत है, न कि समस्या फैलने पर। सरकार को पराली से खाद बनाने के लिए प्रोत्साहन की योजना लानी चाहिए। लोग जागरूक होंगे तो वायु व जल प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सकती है। इसके लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम होने चाहिए। - प्रशांत कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, एचआरआईटी
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निगरानी को योग्य स्टाफ की हो नियुक्ति
पर्याप्त संख्या में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट न होने से हिंडन मैली हो गई है। कई इंडस्ट्रीज ने खुद को अपडेट किया है। वाहनों के साथ चिमनियों, डाइंग, केमिकल से जुड़ी इंडस्ट्रीज व टायर रबर जलाने से सर्वाधिक फैलता है। ऐसे में प्रशासन को बेहतर निगरानी के लिए योग्य स्टाफ की नियुक्ति करनी चाहिए। - साकेत अग्रवाल, उद्यमी, इलेक्ट्रिकल पैनल यूनिट
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आसपास जाने के लिए साइकिल का करें इस्तेमाल
वाहनों की बढ़ती संख्या प्रदूषण का मुख्य कारण है। ऐसे में आसपास जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल व सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल जरूरी है। गड्ढा मुक्त रोड, पार्किंग की पर्याप्त सुविधा, सौर ऊर्जा पर सब्सिडी बढ़ाने, कंस्ट्रक्शन साइट पर नियमित पानी के छिड़काव सहित अन्य कदम उठाए जा सकते हैं। - विनीत राठी, चार्टर्ड एकाउंटेंट
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कैरिकुलम में प्रदूषण से जुड़ा चैप्टर हो
प्रदूषण को रोकने के लिए जरूरत लोगों को जागरूक करने और सही समझ पैदा करने की है। अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अच्छा होगा तो लोग वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करेंगे। कार पुलिंग, डीजल की जगह सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल और बच्चों के कैरिकुलम में प्रदूषण से जुड़ा चैप्टर जोड़ने की जरूरत है। - आशुतोष चित्कारा, चार्टर्ड एकाउंटेंट
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मजबूत सरकारी तंत्र से दिखेंगे सही परिणाम
शहर में वायु प्रदूषण का ग्राफ तो सबसे ऊपर है। हिंडन नदी भी मैली हो चुकी है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मजबूत सरकारी तंत्र बनाने और अधिकारियों की जवाबदेही होनी जरूरी है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए काबिल स्टाफ की जरूरत है। जागरूकता कार्यक्रम व एडवाइजरी जारी होनी चाहिए। - अलका आर्य, उद्यमी, हर्बल व कॉस्मेटिक उत्पाद
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बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है जरूरी
महानगर में जहां देखो बहुमंजिला भवनों का निर्माण होते हुए पाया जाता है। निजी बिल्डर प्रदूषण को रोकने संबंधी मानकों का उल्लंघन करते हुए पाए जाते हैं। इन पर कड़ाई जरूरी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। साइकिल व कार पुलिंग के सकारात्मक परिणाम दिखेंगे। - अंकित जैन, मोबाइल कारोबारी
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प्रदूषण फैलने में इनका है जिम्मेदार
- वाहनों की बढ़ती संख्या
- खराब लोकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम
- उद्योगों की निगरानी का प्रभावी तंत्र न होना
- घटता हरित क्षेत्र, कटते पेड़
- अनियोजित निर्माण कार्य
- सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का अभाव
- नियमों का कड़ाई से पालन न होना
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इन उपायों पर होगा काम तो घटेगा प्रदूषण
- सीएनजी व इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करना
- बहुमंजिला भवनों पर पानी के स्प्रिंकल का लगाया जाना
- टैंकरों से नियमित रूप से पानी का छिड़काव होना
- प्रदूषण को बच्चों व युवाओं के कैरिकुलम से जोड़ना
- शहर के सभी नालों को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ना
- नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन
- प्रदूषण रोकने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करना