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ट्रैफिककर्मियों का कारनामा: रिश्वत न मिलने पर कंट्रोल रूम पर दी फर्जी सूचना, पांच व्यापारियों को फंसाने की कोशिश की

Sun, 11 Jul 2021 09:54 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

कारोबारी नाजिम का कहना है कि ट्रैफिक कर्मियों ने मौके पर मामला निपटाने के नाम पर 20 हजार रुपयों की मांग की और बाद में वह 12 हजार रुपये पर आ गए। आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें जेल भेजने की धमकी देनी शुरू कर दी। वह खुद को व्यापारी बताते हुए सफाई देते रहे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक न सुनी।
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पीड़ित व्यापारी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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चेकिंग के नाम पर वसूली के आरोपों में घिरी रहने वाली ट्रैफिक पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। रिश्वत न देने पर ट्रैफिक कर्मियों ने गढ़मुक्तेश्वर के व्यापारियों को संदिग्ध बदमाश बताते हुए कंट्रोल रूम पर सूचना फ्लैश कर दी। घटना मसूरी क्षेत्र में एनएच-9 स्थित आईएमटी कॉलेज के सामने की है। मामला संज्ञान में आने पर अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों पर जांच बैठा दी। साथ ही व्यापारियों को सम्मान सहित उनकी रकम लौटाकर छोड़ दिया गया।

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गढ़मुक्तेश्वर के मोहल्ला चौधरियान निवासी नाजिम का कहना है कि वह गढ़मुक्तेश्वर में ही रेडीमेड गारमेंट की दुकान चलाते हैं। रविवार को वह कस्बे के अन्य व्यापारियों शाकिब, साहिक, कासिम और ताबिश के साथ कार में माल खरीदने के लिए दिल्ली जा रहे थे। सुबह करीब 10:30 बजे मसूरी में एनएच-9 पर आईएमटी कॉलेज के सामने ट्रैफिक कर्मियों ने उन्हें चेकिंग के नाम पर रोक लिया। ट्रैफिक कर्मचारियों ने उनकी जेबों की तलाशी ली और साथ ही पास में मौजूद बैग भी ले लिया। बैग में करीब 2.32 लाख रुपये थे। रुपयों के बारे में पूछने पर उन्होंने दिल्ली से सामान लाने के लिए रकम ले जाने की बात कही। आरोप है कि इसी बात पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने नंबर दो का पैसा बताते हुए जेल भेजने की धमकी देनी शुरू कर दी और मौके पर मामला निपटाने के लिए कहा।

20 हजार मांगे और 12 हजार पर आ गए
कारोबारी नाजिम का कहना है कि ट्रैफिक कर्मियों ने मौके पर मामला निपटाने के नाम पर 20 हजार रुपयों की मांग की और बाद में वह 12 हजार रुपये पर आ गए। आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें जेल भेजने की धमकी देनी शुरू कर दी। वह खुद को व्यापारी बताते हुए सफाई देते रहे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक न सुनी।
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कंट्रोल रूम पर बता दिए संदिग्ध बदमाश
व्यापारियों ने रिश्वत नहीं दी तो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उन्हें संदिग्ध बदमाश बताते हुए कंट्रोल रूम और डेल्टा पर सूचना फ्लैश कर दी। साथ ही कहा कि संदिग्ध बदमाशों के पास लाखों रुपये की नगदी मौजूद है। इसके बाद मसूरी पुलिस व्यापारियों को थाने ले गई। डेल्टा पर सूचना फ्लैश होने के कारण पैसों की तस्दीक करने के लिए तहसीलदार विजय मिश्रा भी थाने पहुंच गए।

अफसरों से शिकायत में खुली ट्रैफिक कर्मियों की पोल
पुलिस प्रशासन व्यापारियों की नगदी को सीज कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर ही रहा था कि मामले की जानकारी एसएसपी अमित पाठक और एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा को लग गई। उन्होंने जांच कराई तो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों का खेल उजागर हो गया। जिसके बाद एसएसपी ने उनके खिलाफ जांच बैठा दी।

व्यापारियों को सह सम्मान लौटाई रकम, थाने से छोड़ा
एसपी ग्रामीण ने मामले की पड़ताल की तो ट्रैफिक कर्मियों का कारनामा सामने आया। जिसके बाद व्यापारियों को उनकी रकम सह सम्मान लौटाते हुए थाने से छोड़ दिया गया। इसके बाद व्यापारियों ने ट्रैफिक पुलिस के तीन कर्मचारियों के खिलाफ लिखित में शिकायत दी। व्यापारियों के बयान दर्ज कर ट्रैफिक कर्मियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस को हल्के में ले रहे हो, अक्ल ठिकाने आ जाएगी
पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि सप्ताह में दो दिन कोरोना कर्फ्यू रहता है। साथी ही सोमवार को दिल्ली बंद रहती है। जिसके चलते वह रविवार को माल खरीदने जा रहे थे, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के कर्मचारियों ने प्रताड़ित कर दिया। व्यापारियों का कहना है कि रिश्वत न देने पर ट्रैफिककर्मियों ने उन्हें धमकी दी थी कि पुलिस को हल्के में ले रहे हो। थोड़ी ही देर में अकल ठिकाने आ जाएगी। इसके बाद उन्होंने कंट्रोल रूम पर सूचना दी और पुलिस ने पकड़ कर ले गई।
 
जांच बैठा दी है
चेकिंग के नाम पर पांच व्यापारियों से रिश्वत मांगने का मामला संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जांच में ट्रैफिक पुलिस के कर्मचारियों की लापरवाही प्रतीत हो रही है। व्यापारियों के बयान के आधार पर मामले की जांच की जा रही है, जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. ईरज राजा, एसपी ग्रामीण

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