साहिबाबाद। यूपीआई पर टैक्स या शुल्क लगाने से मंडी के व्यापारियों में नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई पर किसी भी प्रकार का कर लगाना डिजिटल इंडिया मुहिम के खिलाफ है। यह छोटे फुटकर व्यापारियों व आम जनता के साथ अन्याय है। डिजिटल भुगतान पर लगा अतिरिक्त शुल्क व्यापार पर प्रभाव डालेगा। व्यापारियों ने अब क्यूआर कोड हटाने शुरू कर दिए हैं। मंडी के थोक कारोबारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और और कैशलेस इकोनॉमी के सपने को पूरा करने के लिए यूपीआई को अपनाया है। आज गली-कूंचे का छोटा फुटकर व्यापारी, ठेले वाला और रेहड़ी वाला भी यूपीआई से लेनदेन कर रहा है। ऐसे में टैक्स लगाना व्यापारियों के साथ अन्याय है। -
अपने निर्णय पर सरकार फिर करे विचार
यूपीआई पर किसी भी प्रकार का कर लगाने से व्यापारी प्रभावित होगा। साथ ही देश की अर्थव्यवस्था फिर से नकदी (कैश) लेनदेन की तरफ लौट जाएगी। इस पर सरकार को एक बार फिर विचार करना चाहिए।- भारत भाटी, थोक व्यापारी।
यूपीआई ग्राहकों की सुविधा के लिए शुरू की गई सेवा है। अब दो हजार के सामान खरीदने पर व्यापारी के खाते से 0.4 प्रतिशत कट जाएगा। इससे व्यापारी आर्थिक बोझ बढ़ेगा।- देवेंद्र शर्मा, थोक व्यापारी।
सरकार की कैशलेश इंडिया की मुहिम में व्यापारियों ने ही सबसे ज्यादा साथ दिया। अब व्यापारी वर्ग पर ही टैक्स लगाना ठीक नहीं। इस अतिरिक्त बोझ से व्यापार में मुश्किलें होंगी।- शाहिद, थोक व्यापारी।
सरकार ने बोला है कि टैक्स व्यापारियों पर लगेगा। इससे ग्राहक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन परेशानी तो ग्राहक को भी होगी। अगर उस समय किसी कारण कैश भुगतान नहीं कर सकता है।- अभिमन्यु गुप्ता, थोक व्यापारी।
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मंडी समिति पहले से ही ज्यादातर भुगतान नकद (कैश) में ही लेती है। चेक से भुगतान तो पहले ही लेना बंद कर दिया था। डिजिटल भुगतान में कुछ व्यापारी यूपीआई करते थे। बाकी डीडी, आरटीजीएस, या बैंक अकाउंट के माध्यम से भुगतान लिया जाएगा।- सुनील कुमार शर्मा, मंडी सचिव, साहिबाबाद