कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद ने शनिवार को कैला भट्ठा में वर्ग विशेष के वोटरों को साधते हुए कहा कि जब देश को बाहरी ताकतों से खतरा हो तो सभी राजनीतिक दल एक होकर उसका मुकाबला करते हैं, अब देश को एक राजनीतिक दल से खतरा है तो वोटों को बंटने मत देना।
उन्होंने भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए वर्ग विशेष के लोगों को एकजुट होने की अपील की।कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी केके शर्मा के समर्थन में हुई जनसभा में उन्होंने कहा कि 1990 में भी यूपी में भाजपा को आने से रोकने के लिए कांग्रेस ने सपा मुखिया मुलायम को समर्थन दिया था, लेकिन अब खतरा उस वक्त से भी ज्यादा है।
देश को बांटने वाली ताकतों को सत्ता से रोकने के लिए 27 साल बाद अब फिर सपा से गठबंधन किया गया है। उन्होंने कहा कि ‘हाथी के खाने के दांत अलग और दिखाने के अलग हैं।’ टीवी पर भाजपा के नेता विकास, भ्रष्टाचार, देश प्रेम और अल्पसंख्यकों की बात करते हैं, लेकिन बंद कमरे में लोगों को आपस में लड़ाने की साजिश करते हैं।
वोटों के ध्रुवीकरण के लिए लोगों को धर्म के नाम पर लड़ाते हैं। उन्होंने बसपा पर भी निशाना साधा। कहा कि जितना खतरा भाजपा से है उतना ही अन्य दलों से भी है। यह वोट काटने वाली पार्टियां भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अल्पसंख्यक वोट तीन जगह बंट जाने की वजह से भाजपा को फायदा मिलता था, लेकिन इस बार वोट नहीं बंटना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर बिजनेस कम्यूनिटी का इस्तेमाल करने और बाद में धोखा देने का आरोप भी लगाया। जनसभा में कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास ने भी कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने की अपील की।
जनसभा में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरेंद्र कसाना, महानगर अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज, सपा जिलाध्यक्ष साजिद हुसैन, महानगर अध्यक्ष संजय यादव, राहुल चौधरी, बिजेंद्र यादव, जाकिर सैफी, ज्योति तिवारी, पूजा चड्ढा आदि मौजूद रहे।
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लखनऊ-दिल्ली में ही नहीं दिलों में दिखना चाहिए गठबंधन
आजाद ने कांग्रेस और सपा के कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की नसीहत देते हुए कहा कि कहा कि गठबंधन केवल दिल्ली-लखनऊ के बीच नहीं हुआ, बल्कि इसका असर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के दिलों में भी दिखना चाहिए। सपा और कांग्रेस दोनों के कार्यकर्ता जी-जान से चुनाव में जुट जाएं, तभी अखिलेश यादव दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे।
उन्होंने कहा कि यह गठबंधन 2019 के लोकसभा चुनाव में भी रहेगा। दिल्ली की लड़ाई भी दोनों दल मिलकर लड़ेंगे।
केके शर्मा को 27 साल बाद टिकट मिलने पर जताया मलाल
आजाद ने केके शर्मा को 1985 में विधायक बनने के बावजूद अगली बार टिकट काटे जाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि सिटिंग विधायक का टिकट काटकर उनका राजनीतिक कत्ल किया गया था। अब 27 साल बाद दोबारा टिकट मिला है तो सूद के साथ उनके नुकसान की भरपाई होनी चाहिए।