गाजियाबाद। जिला जज अनिल कुमार को हटाए जाने के लिए 33 दिन से हड़ताल पर चल रहे वकील सोमवार को गिरफ्तारी देने के लिए कविनगर थाने पहुंच गए। हाथों में नारे लिखी तख्तियां और छह मुकदमों की काॅपी लिए वकीलों ने 40 मिनट तक हंगामा-प्रदर्शन किया और पुलिस से गिरफ्तारी करने के लिए कहते रहे।
पुलिस ने यह कहकर गिरफ्तार करने से इन्कार कर दिया कि सभी मामलों में अभी जांच चल रही है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वापस कचहरी पहुंचकर शाम तक धरना दिया। वकीलों का कहना था कि पुलिस ने आंदोलन के दौरान उन पर कविनगर थाने में छह केस दर्ज कर दिए हैं, लेकिन जब वे इन मामलों में कार्रवाई के लिए थाने पहुंचे तो गिरफ्तारी करने से इन्कार कर दिया।
इससे पहले वकीलों ने कचहरी में जोरदार प्रदर्शन किया। यहां से जुलूस के रूप में सर्विस रोड होते हुए कविनगर थाने पर पहुंचे। पुलिस ने पहले ही थाने के गेट पर बैरियर लगा दिए थे। सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी सुबह ही तैनात कर दिए गए थे। पुलिस ने वकीलों को थाने के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा, सभी केस में जांच चल रही है। जांच के बाद ही कार्रवाई तय हो सकती है।
सुनो...पुलिस गिरफ्तारी
से इन्कार कर रही है
(वकीलों ने लाउडस्पीकर पर कहा)
एसीपी से वार्ता के बाद वकीलों ने लाउडस्पीकर से कहा, सुनो...पुलिस गिरफ्तारी से इन्कार कर रही है। इसके बाद वकीलों ने मांग रखी कि उनके खिलाफ दर्ज किए गए सभी केस खत्म किए जाएं। इस पर पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। वकीलों ने कहा कि जिला जज को हटाए जाने और 29 अक्तूबर को कोर्ट में लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
छह को जुटेंगे 22
जिलों के वकील
(बनेगी रणनीति)
आंंदोलन को और तेज करने के लिए गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने छह दिसंबर को अहम बैठक बुलाई है। इसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति से जुड़े 22 जिलों की बार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। एसोसिएशन के सचिव अमित नेहरा ने बताया कि जिला, तहसील और टैक्स बार को बुलाया गया है। तय किया गया है कि आंदोलन के दौरान अगर कोई अधिवक्ता न्यायिक कार्य करता मिला तो उसकी सदस्यता पांच वर्ष के लिए रद्द कर दी जाएगी।
छह केस दर्ज कर चुकी पुलिस
1. पहला केस 29 अक्तूबर को कोर्ट की नाजिर की ओर से दर्ज कराया गया। इसमें पूर्व बार अध्यक्ष नाहर यादव, एडवोकेट अभिषेक यादव, दिनेश यादव नामजद हैं। 40-50 आरोपी अज्ञात हैं। कोर्ट में पथराव, तोड़फोड़ करने और पुलिस चौकी फूंकने का आरोप है।
2. दूसरा केस भी 29 अक्तूबर को ही दर्ज किया गया। यह पुलिस की ओर से दर्ज किया गया था। इसमें सभी 50 आरोपी अज्ञात में हैं। वकीलों पर चौकी में घुसकर तोड़फोड़ करने और सीसीटीवी व डीवीआर को क्षतिग्रस्त करने का आरोप है।
3. तीसरा केस 12 नवंबर को दर्ज कराया गया। इसमें वकीलों पर कचहरी के सामने रास्ता जाम करने का आरोप है। यह केस वहां से गुजर रहे तरुण तोमर की ओर से दर्ज किया गया। आरोप है कि ट्रैफिक जाम लगने से मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।
4. चौथा केस प्रताप विहार निवासी दुर्वेश चंद शर्मा की ओर से 12 नवंबर को ही दर्ज कराया गया। दुर्वेश का वकीलों पर आरोप है कि जाम लगाने के दौरान उनके साथ हाथापाई की और उनकी गाड़ी का शीशा पत्थर मारकर तोड़ दिया।
5. पांचवा केस 29 नवंबर सिविल जज के पेशकार संजय कौशिक की ओर से दर्ज कराया गया। इसमें अधिवक्ता अतुल डोभाल नामजद हैं। एक महिला और एक अन्य अज्ञात में हैं। आरोप है कि इन लोगों ने लोकसेवक का अपमान किया और धमकी दी।
6. छठा केस भी 29 नवंबर को दर्ज कराया गया। यह कोर्ट के नाजिर की ओर से लिखा गया। इसमें 44 वकील नामजद हैं। आरोप है कि वकीलों ने कोर्ट में घुसकर हंगामा किया। इससे सरकारी काम में बाधा पहुंची।