नगर निगम बोर्ड बैठक में तीन बार प्रस्ताव पास होने के बावजूद पुराने शहर के मकानों को स्थायी पता न मिल सका। नगर निगम न तो गलियों को नंबर दे पाया और न ही मकानों को। निगम के गठन के करीब 20 साल बाद भी मकान मालिकों को अपने मकान का परमानेंट एड्रेस नहीं पता। इसको लेकर मालीवाड़ा के पार्षद और लोगों में रोष है।
मालीवाड़ा के पार्षद राजेंद्र तितोरिया ने सदन में तीन बार यह मामला उठाया और तीनों बार सदन ने प्रस्ताव पास कर मकानों और गलियों को नंबर देने की बात कही। यह प्रस्ताव अभी तक फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया। 14 जुलाई को हुई बोर्ड बैठक में फिर से यह प्रस्ताव पास कर दिया गया था। इसके बाद भी योजना पर काम शुरू नहीं हुआ।
मालीवाड़ा के पार्षद राजेंद्र तितौरिया का कहना है कि मकानों को स्थायी पता न मिलने की वजह से चिट्ठियां, परीक्षाओं के प्रवेश पत्र और एप्वाइंटमेंट लैटर भी वापस लौट जाते हैं। रिश्तेदारों को भी पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जल्द ही गलियों और मकानों को नंबर देने की योजना पर काम शुरू न हुआ तो आगामी बैठक में वह इस मुद्दे पर अफसरों से जवाब मांगेंगे।