- कॉपर-टी की खरीद में नियमों की अनदेखी से सरकारी खजाने को 8.22 लाख रुपये की चपत
- सीबीआई की विशेष अदालत ने तीनों दोषियों पर लगाया एक-एक लाख रुपये का जुर्माना
गाजियाबाद। चंदौली में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) से जुड़े घोटाले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने तत्कालीन सीएमओ परिवार कल्याण डॉ. विभूति प्रसाद, उपभोक्ता सहकारी संघ लखनऊ के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल जायसवाल और दवा कारोबारी सुरेंद्र पांडेय को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। पीठासीन अधिकारी अवनीश कुमार पांडेय ने तीनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मामला स्वास्थ्य विभाग में महिलाओं को गर्भधारण से रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉपर-टी की खरीद में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था। अदालत के समक्ष प्रस्तुत मामले के अनुसार, वर्ष 2008 से 2010 के बीच चंदौली में स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,694 कॉपर-टी खरीदी गई थीं। खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप था। जांच में सीबीआई को खरीद प्रक्रिया के कई स्तरों पर अनियमितताएं मिलीं। एजेंसी के मुताबिक निजी हित साधने के कारण सरकार को 8.22 लाख रुपये की राजस्व क्षति हुई थी।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। जांच में तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी, सहकारी संघ के अधिकारी और दवा कारोबारी की भूमिका सामने आने के बाद एजेंसी ने वर्ष 2014 में प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद दस्तावेज जुटाकर खरीद प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 15 दिसंबर 2015 को अदालत में तीनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद विशेष सीबीआई अदालत में 28 जनवरी 2016 से मामले की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए गए। संबंधित पक्षों के बयान दर्ज होने के साथ खरीद प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर बहस हुई।