बिजली कटौती की मार झेल रहे शहरवासियों को अगले दो-तीन दिन तक राहत मिलने की संभावना नहीं है। अनपरा सहित विभिन्न पावर स्टेशनों में कोयले की आपूर्ति रुकने और उत्पादन प्रभावित होने से प्रदेश में बिजली संकट खड़ा हो गया है।
शुक्रवार को भी जनपद को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने शहरवासियों से 12 से 15 घंटे की कटौती झेलनी पड़ी।बृहस्पतिवार को शहर के अधिकांश क्षेत्रों में रात नौ बजे गई बिजली देर रात सवा दो बजे आई। फिर भी बिजली की आंख-मिचौली चलती रही।
शुक्रवार को भी शास्त्रीनगर, संजय नगर, राजनगर, पटेल नगर, मेरठ रोड, नंदग्राम सहित विभिन्न क्षेत्रों में सुबह साढ़े आठ बजे गई बिजली दोपहर दो बजे करीब आई। इसके बाद शाम चार बजे से देर रात तक लगातार कई घंटों की कटौती से नेहरूनगर, कविनगर, शास्त्रीनगर, संजय नगर, नंदग्राम, मेरठ रोड के अलावा लाइनपार क्षेत्र के विजय नगर, प्रताप विहार, कैला भट्टा के लोग बेहाल रहे।
देर रात भी कट जारी रहा। बिजली नहीं आने से अधिकांश घरों में इनवर्टर भी बंद हो गए। इस दौरान बिजली न आने से लोगों को पानी की समस्या से भी जूझना पड़ा।
कंट्रोल रूम सहित अफसरों के नहीं उठ रहे नंबर
बीते दो दिन से हो रही अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ कर रख दी है। उमस भरी गर्मी में रात में हो रही घंटों की बिजली कटौती से लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है। लोगों ने जब कंट्रोल रूम का मोबाइल नंबर मिलाया तो वह स्विच ऑफ था। शास्त्रीनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी अधिकारियों के नंबर भी स्विच ऑफ रहे।
पावर स्टेशनों को नहीं मिल रहा कोयला
प्रदेश के अनपरा, ओबरा, पनकी सहित अन्य पावर स्टेशन में कोयले की आपूर्ति रुकने से प्रदेश में 1000 से 1500 मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। इसका सीधा असर बिजली की सप्लाई पर पड़ रहा है। वहीं, पावर स्टेशनों को मिल रहा गीला कोयला भी उत्पादन में कटौती होने की वजह है। इससे पूरे पश्चिमांचल में ही बिजली का संकट खड़ा हो गया है।
अधिशाषी अभियंता यतेंद्र कुमार ने बताया कि अनपरा सहित अन्य पावर स्टेशन में बिजली उत्पादन प्रभावित होने का असर आपूर्ति पर पड़ा है। लखनऊ से सप्लाई नहीं मिलने के कारण लोगों को कटौती का सामना करना पड़ रहा है। अगले एक-दो दिन कटौती की समस्या झेलनी पड़ सकती है।