गाजियाबाद। पुलिस की स्वॉट ने दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में मोबाइल फोन टावरों से महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में गाजियाबाद नगर निगम का सफाईकर्मी भी शामिल है। आरोपियों के कब्जे से 20 रिमोट रेडियो यूनिट (आरआरयू), सात बेस बैंड यूनिट (बीबीयू) और एक बीएमडब्ल्यू कार बरामद की गई है। बरामद उपकरणों की कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था राजकरन नैय्यर के अनुसार, चोरी के आरोप में अदनान उर्फ अज्जू (23) निवासी मोहल्ला कोटला कस्बा मीरापुर जनपद मुजफ्फरनगर हाल निवासी सेक्टर-31 फरीदाबाद हरियाणा, आमिर (26) निवासी ग्राम कसेरवा थाना शाहपुर जनपद मुजफ्फरनगर हाल निवासी 60 फुटा रोड पसोंडा टीला मोड़ और सौरभ (20) निवासी ग्राम टीला शाहबाजपुर लोनी बॉर्डर पकड़े गए हैं।
आमिर 10वीं पास है और वर्ष 2023 में जमीन के विवाद में हत्या के मामले में जेल जा चुका है। अदनान उर्फ अज्जू ने 12वीं तक पढ़ाई की है, वह फरीदाबाद में स्क्रैप की दुकान पर काम करता था। सौरभ गाजियाबाद नगर निगम में सफाईकर्मी है। आमिर व अदनान के संपर्क में आने के बाद वह मोबाइल फोन टावर से उपकरण चोरी करने लगा। आमिर के खिलाफ मुजफ्फरनगर के शाहजहांपुर और सिहानी गेट गाजियाबाद में दो मामले दर्ज हैं। सौरभ व अदनान का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। तीनों की चल-अचल संपत्ति की जांच भी की जा रही है।
थाईलैंड और हांगकांग तक जुड़े हैं तार, चार अन्य आरोपियों की तलाश
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मोबाइल फोन टावरों से आरआरयू और बीबीयू चोरी कर उन्हें मेरठ निवासी सोनू, शहनवाज, अनस, जावेद आदि को सस्ते दामों में बेच देते थे। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। ये चारों इन उपकरणों को थाईलैंड और हांगकांग में पांच से दस लाख रुपये प्रति यूनिट तक बेचते थे। आमिर की अनस से भोजपुर जेल में मुलाकात हुई थी, तब वह हत्या के आरोप में बंद था।
कई राज्यों में कर चुके वारदात
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें एक यूनिट चोरी करने के बदले 20 से 30 हजार रुपये मिलते थे। गिरोह के सदस्य पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और गाजियाबाद समेत कई स्थानों पर वारदात कर चुके हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी के उपकरण विदेशी बाजारों तक किस माध्यम से पहुंचाए जा रहे थे।
यह होते हैं बीबीयू और आरआरयू
बीबीयू मोबाइल फोन टावर का मुख्य डिजिटल सिस्टम होता है, जो डेटा और वॉयस कॉल को नेटवर्क सिग्नल में बदलने का काम करता है। इसे मोबाइल फोन टावर का मस्तिष्क माना जाता है। आरआरयू एंटेना के नीचे लगा उपकरण होता है, जो मोबाइल फोन डिवाइस को वायरलेस नेटवर्क से जोड़ता है। बाजार में बीबीयू की कीमत पांच से 10 लाख रुपये, जबकि आरआरयू की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये है।