इंदिरापुरम। पुलिस ने मिनी ट्रैवलर बस में बैठकर एनसीआर के लोगों को टेली कॉलिंग के जरिए जाल में फंसाकर ढाई करोड़ से ज्यादा की ठगी करने वाले तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य डेढ़ साल से ठगी कर रहे थे। तीनों यूट्यूब के लिए वीडियो शूट करने के बहाने दो हजार रुपये प्रतिदिन किराये पर मिनी बस लाते थे। तीनों शातिर क्रेडिट कार्ड धारकों को कॉल करके उन्हें रिडीम प्वाइंट का झांसा देकर निवेश कराते थे। पुलिस को तीनों से मिनी ट्रैवलर बस, 20 फोन, 16 सिम कार्ड, क्रेडिट कार्ड धारकों के नाम और नंबर लिखे 31 पेज, 30 बैटरियां, चार चेकबुक और किराये अनुबंध की तीन कापियां बरामद की है।
सहायक पुलिस आयुक्त इंदिरापुरम स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि सुशांत कुमार पुत्र सुरेश कुमार निवासी नंद विहार द्वारका सेक्टर -16 दिल्ली मूल निवासी त्रिवेंद्रम केरल, सन्नी कश्यप पुत्र ओमवीर निवासी विकास कुंज फर्रुखनगर टीला मोड़, अमन गोस्वामी पुत्र घनश्याम निवासी राजनगर कॉलोनी थाना लोनी बॉर्डर को गिरफ्तार किया है। आरोपी सुशांत ने पूछताछ में बताया कि उनके गिरोह में सात लोग काम करते हैं, जिसमें एक लड़की उन्हें क्रेडिट कार्ड धारकों का डेटा उपलब्ध कराती है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उनका एक दोस्त यूट्यूब पर वीडियो शूट करने का काम करता है। उसी के नाम पर आरोपी दिल्ली गाेकुलपुरी से चालक को दो हजार रुपये देकर उसकी किराये पर मिनी ट्रैवलर बस लाते थे। बाद में आरोपी मिनी ट्रैवलर में बैठकर वारदात को अंजाम देते।
डिटेल नहीं देने वाले कार्ड धारकों से करते थे अभद्रता : पूछताछ में सन्नी ने बताया कि गिरोह का एक सदस्य उन सभी को मोबाइल और सिम उपलब्ध कराता। गिरोह सरगना के इशारे पर सदस्यों को ठगी के जाल में फंसाने का लक्ष्य मिलता था। योजना के तहत जो भी शातिरों को अपना डेटा या जानकारी लिंक के जरिए नहीं देता था तो उससे ये अभद्रता करते थे। इतना नहीं, आरोपी कार्ड धारकों के निवेश प्वाइंट को अपने खाते में जल्दी से जल्दी ट्रांसफर कर उसे चेक से निकाल लेते थे। ठगी की रकम जमा करने के लिए गिरोह के सदस्य फर्जी किराया अनुबंध बनवाकर पैन कार्ड के जरिए बैंक में खाते खुलवाते थे। महीने या दो महीने बाद दिल्ली-एनसीआर के लोगों से ठगी करने के बाद खातों को बंद कर देते थे।
इंदिरापुरम थाना प्रभारी रविंद्र गौतम ने बताया कि तीनों आरोपी चलती-फिरती मिली ट्रैवलर बस में ठगी की वारदात को अंजाम देते। किसी को उन पर शक न हो इसके लिए बस चालक को यूट्यूब की वीडियो शूट करने का झांसा देते थे। इतना ही नहीं, पूरे गिरोह में सात लोग जुड़े हैं। गिरोह की सरगना एक युवती है। पुलिस को उसका नाम और पता मिल गया है। वही सदस्यों को नए सिम और कीपैड वाले फोन उपलब्ध कराती थी। ठगी के दौरान शातिर सरगना सदस्यों के निजी फोन अपने पास रख लेती थी। एक रात में ठगी का लक्ष्य पूरा होने के बाद उन्हें सुबह में फोन देती थी।
चेकबुक और बैंक खातों से खुलेगा ठगी का राज : एसीपी का कहना है कि शातिरों के पास से टीम को चार चेकबुक मिली है। इन्हीं चेक से शातिर ठगी की रकम खातों से निकालते थे। पुलिस को इनके खातों की जानकारी मिली है।