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Ghaziabad News: मेट्रो और आरआरटीएस पर नहीं लगेगा कर

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गाजियाबाद। नगर निगम के बड़े बकायेदारों में शामिल दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को बड़ी राहत मिली है। मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) को करों से छूट प्रदान की गई है। शासन की ओर से इसकी अधिसूचना जारी हो गई है। डीएमआरसी पर नगर निगम का 54 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति कर बकाया था, जबकि आरआरटीएस पर अभी तक संपत्ति कर अधिरोपित नहीं किया गया था।
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शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा-221 (3) के तहत प्रदत्त शाक्तियों का प्रयोग करते हुए मेट्रो रेल और आरआरटीएस की समस्त संपत्तियों को नगर निगम की ओर से अधिरोपित करों से छूट प्रदान की गई है। नगर निगम के करीब दो हजार बड़े बकायेदार हैं। इनमें 250 करोड़ रुपये से अधिक केंद्रीय और राज्य सरकार के अधीन आने वाले महकमों पर बकाया हैं। बड़े बकायेदारों में 1400 ऐसे हैं, जिन्होंने पांच साल से अधिक समय से संपत्तिकर जमा ही नहीं किया है। इनमें दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी), रेलवे, सीआईएसएफ और दूर संचार विभाग जैसे बड़े केंद्र सरकार के अधीन कार्यालयों के अलावा विद्युत विभाग, कलक्ट्रेट और जीडीए भी शामिल हैं। इन्हें कई बार नोटिस भी भेजा जा चुका है। इस बीच मेट्रो रेल को करों के दायरे से बाहर कर शासन ने डीएमआरसी को बड़ी राहत देने का काम किया है।


वेव सिटी मामले में कल होगा फैसला
गाजियाबाद। हाईटेक टाउनशिप वेव सिटी का हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर की वसूली न किए जाने के प्रावधान को समाप्त/संशोधन करने के मामले में गठित कमेटी की बैठक बुधवार को लखनऊ में होगी। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के विशेष सचिव उदय भानु त्रिपाठी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा भी शामिल होंगे। 28 नवंबर 2023 को महापौर सुनीता दयाल ने वेव सिटी का संपत्ति कर जमा न होने और कचरा निस्तारण न होने का मामला नगर विकास मंत्री के समक्ष उठाया था। पत्र के माध्यम से महापौर ने बताया था कि वेव सिटी में भवनों के निर्माण से करोड़ों रुपये की आय विकासकर्ता अर्जित कर रहा है। पांच हजार भवनों का कचरा वेव सिटी के बाहर डाला जा रहा है, जिसका निस्तारण नगर निगम को करना पड़ रहा है। नगर निकाय को हस्तांतरण होने तक कर नहीं लगाए जा सकते, लेकिन सात वर्ष की अवधि के बाद टाउनशिप में कर अधिरोपित करने की कार्रवाई अमल में लाई जाए।
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