गाजियाबाद। इंदिरापुरम में जिले का पहला टर्शियरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी) जून से शुरू हो जाएगा। 40 एमएलडी क्षमता के इस प्लांट से साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों में पानी की आपूर्ति होगी। प्लांट शुरू होने के बाद औद्योगिक जरूरत के लिए भूजल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलेगी। सभी परिसरों में भूजल के प्रयोग पर पूर्ण पाबंदी लगाई जाएगी।
साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में 2,200 औद्योगिक इकाइयां हैं। यहां बड़े पैमाने पर डाइंग और प्रिंटिंग उद्योग स्थापित थे लेकिन दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर लगातार सख्ती के बीच अधिकांश इकाइयां शिफ्ट हो चुकी हैं। अब केवल 15 से 20 डाइंग और प्रिंटिंग इकाइयां संचालित हो रही हैं। औद्योगिक जरूरत के लिए अब तक भूजल का प्रयोग हो रहा है। इस कारण यहां भूजल स्तर 250 से 300 फुट नीचे पहुंच गया है। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में शोधित पानी की आपूर्ति कर उद्योगों की जरूरत को पूरा किया जाएगा।
इसके लिए तकरीबन 282 करोड़ रुपये की लागत से इंदिरापुरम में टीएसटीपी तैयार किया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य 75 प्रतिशत पूरा हो गया है। नगर निगम के जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद ने बताया कि जून तक औद्योगिक क्षेत्र में एसटीपी से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। कुल 1400 उद्योगों इसका लाभ उठा सकेंगे। अब तक 270 उद्योगों के साथ नगर निगम ने अनुबंधक कर लिया है। टीएसटीपी बनने से औद्योगिक क्षेत्र में भूजल दोहन की समस्या खत्म हो जाएगी।
तीन स्तर पर होगा दूषित पानी का शोधन
आमतौर पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में दूषित पानी का दो बार शोधन होता है लेकिन टीएसटीपी में तीन बार शोधित कर पानी को प्रयोग में लाया जाएगा। इसके पानी में मानकों के मुताबिक बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा को कम किया जाएगा। पानी की गुणवत्ता बेहतर होने पर उद्योगों को आपूर्ति की जाएगी। इस पानी का उपयोग केवल औद्योगिक जरूरत को पूरा करने के लिए होगा।
रोजाना बचेगा चार करोड़ लीटर पानी
टीएसटीपी को पूरी क्षमता के साथ चलाया जाएगा तो इससे करीब चार करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति साहिबाबाद के उद्योगों को की जा सकेगी। मतलब, इतना भूजल दोहन होने से बचाया जा सकेगा। भूजल स्तर के मामले में गाजियाबाद डार्क जोन में है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्रों में टीएसटीपी भूजल संरक्षण में काफी मददगार साबित होगा।
लगातार नीचे जा रहा भूजल स्तर
एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष-2017 में मानसून के बाद जलस्तर 24.79 मीटर मापा गया था। वर्ष 2022 में इसमें और गिरावट आई। भूजल स्तर 33.80 मीटर हो गया। गाजियाबाद में लगभग 27 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। सभी इकाइयों के बोरवेल का सर्वे कराया गया है।