माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। बार एसोसिएशन गाजियाबाद के चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं में घमासान मचा हुआ है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश जहां एक महीने के भीतर चुनाव कराने पर जोर दे रही है, वहीं एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने फरवरी तक चुनाव टालने के संकेत दिए हैं। दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि जिन अधिवक्ताओं के पास एसओपी नंबर नहीं है, उन्हें मतदान या चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है।
बार एसोसिएशन गाजियाबाद का पिछला चुनाव 19 जुलाई 2024 को हुआ था। एक वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन नया चुनाव नहीं हो सका है। बार काउंसिल के अध्यक्ष ने इस संबंध में जिला जज, जिलाधिकारी और एल्डर कमेटी के चेयरमैन को पत्र भेजकर 15 नवंबर 2025 से पहले चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र के बाद एल्डर कमेटी के चेयरमैन देशराज सिंह नागर ने अध्यक्ष और सचिव से मतदाता सूची मांगी थी ताकि चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सके। कार्यकारिणी ने यह कहते हुए सूची देने से इन्कार कर दिया कि मतदाता सूची अभी तैयार नहीं है। इससे वकीलों में नाराजगी बढ़ गई है।
अध्यक्ष और सचिव पद के उम्मीदवारों ने एल्डर कमेटी से लिखित में मांग की है कि चुनाव हर हाल में 15 नवंबर से पहले कराए जाएं। उम्मीदवारों ने भरोसा दिलाया कि वह पूरी प्रक्रिया में समिति को पूरा सहयोग देंगे। अध्यक्ष पद के दावेदारों का क्रमिक अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। अधिवक्ताओं ने कार्यकारिणी पर जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया को लटकाने का आरोप लगाया है।
एल्डर कमेटी के चेयरमैन देशराज सिंह नागर ने कहा कि वह शुक्रवार को अध्यक्ष और सचिव से दोबारा बातचीत करेंगे। उसके बाद ही चुनाव की तारीख पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल बार काउंसिल और कार्यकारिणी के बीच खींचतान से अधिवक्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।