गाजियाबाद। जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। रविवार को दिन में धूप निकलने के बावजूद शीतलहर परीक्षा लेती रही। अगले कुछ दिन तक शीतलहर और कोहरा जनजीवन के लिए चुनौती बना रहेगा। मौसम विभाग ने जिले के लिए आज कोहरे और शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके बाद दो दिन तक कोहरे का येलो अलर्ट रहेगा। शीतलहर भी चलती रहेगी।
चेतावनी के मुताबिक, इस दौरान घने कोहरे के साथ सर्द हवाएं चलने और गलन बढ़ने की संभावना है। इससे खासकर सुबह और रात में परेशानी अधिक रहेगी। मौसम में बदलाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत स्कूलों में नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक 15 जनवरी तक छुट्टी कर दी है। साथ ही कक्षा छह से 12वीं तक के समय में बदलाव कर किया गया है। अगले आदेश तक ये विद्यालय सवेरे 10 बजे खुलेंगे और बंद होने का समय तीन बजे रहेगा।
मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए चिकित्सकों ने भी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह ढककर रखने और शीतलहर से बचने के लिए कहा है।
प्रदेश का चौथा सबसे ठंडा जिला रहा गाजियाबाद
रविवार को गाजियाबाद प्रदेश का चौथा सबसे ठंडा जिला रहा। जिले का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मेरठ 4.1 डिग्री के साथ पहले, नोएडा 4.4 डिग्री के साथ दूसरे और बहराइच 4.6 डिग्री के साथ तीसरे स्थान पर रहा। गाजियाबाद में अधिकतम तापमान 17.8 डिग्री रहा। आर्द्रता 90 फीसदी और हवा 12 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली। इस दौरान चटख धूप निकली, जिसने कुछ राहत दी, लेकिन शीतलहर भी चलती रही। कोहरे के साथ आधी रात के बाद पाला भी पड़ा। इससे दृश्यता कम हुई। वाहनों को रेंगकर चलना पड़ा। हालांकि, दिन निकलते कोहरा छंट गया और यातायात सुचारू हो पाया। पाला गिरने से सवेरे गलन महसूस हुई। गंगनहर के आसपास के खेतों में सवेरे बर्फ की चादर जमी मिलीं।
अभी और गिरेगा न्यूनतम पारा
मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि आधी रात के बाद कोहरा पड़ेगा। दृश्यता काफी कम होगी। सोमवार को अधिकतम तापमान एक डिग्री नीचे आकर 15 व न्यूनतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। धूप निकलने की भी स्थिति बन रही है। अगले तीन-चार दिन तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा। दिन और रात के तापमान में तीन गुना से ज्यादा का अंतर दिखेगा।
गेहूं के लिए संजीवनी
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविंद यादव ने बताया कि इस वक्त पड़ रहा पाला गेहूं की फसल के लिए किसी उर्वरक से कम नहीं है। शुरुआत में भले ही मौसम थोड़ा अनुकूल नहीं रहा, लेकिन इस वक्त गेहूं की फसल का विकास बेहतर हो रहा है। ऐसे ही स्थिति बनी रही तो निश्चित ही गेहूं की बंपर पैदावार होगी। हालांकि, पाला पड़ने से सब्जी किसानों का काम प्रभावित हो रहा है। गन्ने की छिलाई का काम भी धूप निकलने पर ही चल रहा है।