भीषण गर्मी सड़कों पर पसरा सन्नाटा
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एक दिन पारा थोड़ा नीचे आने के बाद रविवार को सूरज के तेवर फिर तल्ख हो गए। रविवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विभाग की मानें तो मई महीने में इस चिलचिलाती गर्मी से बड़ी राहत नहीं मिलेगी।
ऐसे में सूरज के तल्ख तेवर हो तो दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक घर से बाहर धूप में निकलने से परहेज करें। उधर, तापमान बढ़ने की वजह से गाजियाबाद के दो सरकारी अस्पतालों में रोजाना एक हजार से 1200 मरीज डायरिया, हीट स्ट्रोक और डिहाईड्रेशन के पहुंच रहे हैं।
मौसम विभाग के साइंटिस्ट व निदेशक डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक मई महीने में गर्मी से राहत की उम्मीद नहीं है। बंगाल की खाड़ी में साइक्लोन की वजह से बांग्लादेश और समुद्री तटीय इलाकों में बारिश और आंधी के चलते तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
पूर्वी हवाओं के चलने से आद्रता अभी बढ़ी रहेगी। उन्होंने बताया कि यह साइक्लोन भी कमजोर पड़ गया है। ऐसे में तापमान फिर बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि फिलहाल गर्मी से सिर्फ अस्थायी राहत ही मिल सकती है।
डॉ. रंजीत सिंह का कहना है कि सबसे ज्यादा तापमान दोपहर एक से तीन बजे के बीच रहता है। बेहद जरूरी न हो तो इस दौरान सीधे धूप के संपर्क में आने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि 29 जून तक दिल्ली-एनसीआर में मानसून पूरी तरह सक्रिय होने का अनुमान है।
गर्मी से बीमार होने वालों की बढी संख्या
इस भीषण गर्मी में बड़े हो या नौनिहाल सभी बेहाल हैं। संयुक्त जिला अस्पताल और एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन 2300 से 2400 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें से 1100 से 1200 मरीज सिर्फ हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और डायरिया के मरीज होते हैं। एमएमजी के फिजिशियन डॉ.आरपी सिंह के मुताबिक डायरिया और डिहाइड्रेशन के मरीजों में बच्चों की संख्या ज्यादा है।