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Ghaziabad News: एक आंगन में चार पीढ़ियों की मुस्कान...खिलखिला रहे मकान

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गाजियाबाद। बदलते दौर में एकल परिवारों का चलन तेजी से बढ़ा है। रिश्ते मोबाइल फोन की स्क्रीन, सोशल मीडिया और औपचारिक मुलाकातों तक सिमटते जा रहे हैं। इस सबके बीच शहर के कुछ परिवार आज भी अपने आंगन में कई पीढ़ियों की मुस्कान संजोए हुए हैं। एक ही छत के नीचे दादा-दादी का आशीर्वाद, बच्चों की खिलखिलाहट और परिवार के हर सदस्य का साथ इन घरों को सिर्फ मकान नहीं, बल्कि अपनेपन और संस्कारों का संसार बनाता है। परिवार दिवस पर ऐसे संयुक्त परिवार यह संदेश दे रहे हैं कि साथ रहने की सबसे बड़ी ताकत प्रेम, सहयोग और एक-दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहने में है।
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सुख-दुख में एक-दूसरे का सहारा बनता है परिवार

राजनगर निवासी शन्नो देवी का परिवार संयुक्त परिवार की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। परिवार में उनके तीन बेटे, बहुएं, पोते-पोतियां और चौथी पीढ़ी के परपोते तक शामिल हैं। कुल 13 सदस्य एक साथ रहते हैं। परिवार के बड़े बेटे आशु वर्मा बताते हैं कि तीनों भाई अपने परिवार सहित एक ही घर में रहते हैं और यही एकजुटता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने एक घटना याद करते हुए बताया कि पिछले वर्ष उनके भाई मुकेश वर्मा सीढ़ियों से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय घर के कई सदस्य मौजूद थे। बेटे और भतीजों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय रहते उपचार मिल सका। चिकित्सकों ने भी कहा कि थोड़ी देर और हो जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। करीब छह महीने तक पूरे परिवार ने मिलकर उनकी देखभाल की। आशु वर्मा कहते हैं कि संयुक्त परिवार में कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं पड़ता। हर सुख-दुख में पूरा परिवार साथ खड़ा रहता है।

कभी घर में ताला लगाने की जरूरत नहीं पड़ी
राजनगर के ही वीर सिंह चौधरी का परिवार भी संयुक्त परिवार की मजबूत मिसाल है। वीर सिंह अपने भाइयों रामवीर सिंह चौधरी और श्याम देव चौधरी के परिवार के साथ रहते हैं। कुल 21 सदस्य एक साथ रहते हैं। इनमें बेटे-बहू और पोते-पोतियां शामिल हैं। परिवार के सदस्य अविनाश चौधरी बताते हैं कि बड़े परिवार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि घर कभी सूना नहीं रहता। आज तक घर में ताला लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। वीर सिंह कहते हैं कि परिवार की असली ताकत आपसी सहयोग और अपनापन है। शादी-ब्याह से लेकर बीमारी तक हर जिम्मेदारी परिवार के सदस्य मिलकर निभाते हैं। अस्पताल की दौड़-भाग हो या घर पर देखभाल, हर काम बांट लिया जाता है। यही वजह है कि उन्हें कभी बाहरी मदद या केयरटेकर की जरूरत महसूस नहीं हुई।
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38 लोगों के सिर पर एक छत, पिता के अनुशासन से चलती पूरी व्यवस्था

साहिबाबाद के शहीदनगर की तंग गलियों में एक ऐसा संयुक्त परिवार बसता है, जो एकता और अनुशासन की मिसाल है। मूल रूप से बागपत के असरा गांव से जुड़े और ‘महल वालों’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस परिवार में तीन पीढ़ियों के कुल 38 सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं। परिवार की पूरी व्यवस्था आज भी घर के मुखिया इरशाद अहमद के अनुशासन और नेतृत्व में चलती है, जिन्होंने दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त होकर यह पारिवारिक ढांचा संभाला हुआ है। इरशाद अहमद का कहना है कि सेवा के दौरान सीखा गया अनुशासन ही उनके बड़े परिवार को जोड़कर रखने की सबसे बड़ी ताकत है। घर की जिम्मेदारी से लेकर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों तक, हर निर्णय में उनकी अहम भूमिका रहती है। उनकी पत्नी भी परिवार को जोड़कर रखने में बराबर सहयोग देती हैं। उनके परिवार में सात बेटे नौशाद, शहजाद, इजहार, इसरार, शद्दाम, इकरार व इंतजार और दो बेटियां शामिल हैं। बेटे-बेटियों के बच्चे भी हैं। बड़ी बेटी तबस्सुम वर्तमान में पसौंडा क्षेत्र से पार्षद हैं, जबकि छोटी बेटी तरन्नुम गृहिणी हैं। परिवार पहले 39 सदस्यों का था, लेकिन दो वर्ष पूर्व एक दुखद घटना में छोटी बेटी के पुत्र की मृत्यु के बाद अब परिवार 38 सदस्यों का रह गया है। परिवार का कहना है कि इतने बड़े संयुक्त ढांचे के चलते राजनीतिक दल भी समय-समय पर उनसे संपर्क में रहते हैं। वर्ष 2004 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी उनके घर पहुंच चुके हैं।
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