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समस्या न समाधान...पब्लिक का बस करेंसी पर ध्यान

Thu, 17 Nov 2016 11:52 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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अन्य - फोटो : अमर उजाला
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एक सप्ताह पहले तक अपनी शिकायत और उसके समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाने वाले लोग अब सुबह से शाम तक बैंकों के बाहर ही नजर आते हैं। करेंसी बदलने को उमड़ती भीड़ को देखकर लगने लगा है कि पब्लिक की सबसे बड़ी टेंशन अब 1000-500 के बंद हो चुके नोट बन चुक हैं।
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जनता इनसे जल्द से जल्द निजात पाकर नई करेंसी हासिल करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात 12 बजे से देश में 1000-500 के नोटों को चलन से क्या बाहर किया कि शहर की जनता की दिनचर्या ही बदल गई।

पब्लिक की शिकायतों और समस्याओं को सुनने वाले पुलिस-प्रशासन के अधिकारी भी अब अपने दफ्तरों में खाली बैठे रहते हैं। विगत एक सप्ताह के आंकडे़ बताते हैं कि पुलिस के चौकी-थाने, प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तर, नगर निगम का शिकायत केंद्र और कलक्ट्रेट स्थित जनसुविधा केंद्र भी खाली पड़ा रहता है।
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हमेशा ही धरने प्रदर्शन से गुलजार रहने वाले कलक्ट्रेट के गलियारों में भी अब इक्का-दुक्का व्यक्ति ही दिखाई देता है। जनसुविधा केंद्र पर भी जहां विभिन्न प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोग घंटों लाइन लगाते थे, वह खिड़कियां भी अब सूनी-सूनी सी दिखती हैं।

यहां तक कि पुलिस के चौकी थानों में आने वाली शिकायतें भी दस प्रतिशत ही रह गई हैं। कंट्रोल रूम पर भी शिकायतों का ग्राफ काफी गिरा है। उधर बैंकों के बाहर लाइन में बंद हो चुके नोटों को बदलने की जद्दोजहद करने वाली पब्लिक को देखकर ऐसा लग उन्हें अब न अपनी किसी समस्या की चिंता है और न ही समाधान की।

उनका ध्यान बस करेंसी बदलवाने में लगा हुआ है। बृहस्पतिवार को भी अमर उजाला टीम ने नगर निगम, कलक्ट्रेट, पुलिस थाने के साथ ही जनसुविधा केंद्र का जायजा लिया। सभी जगह बिलकुल सूने पडे़ हुए थे। साइनेज कारोबारी दुष्यंत गुप्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह फैसला वास्तव में तारीफ के काबिल है, मगर इससे फिलहाल लोगों को परेशानी हो रही है।
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