गाजियाबाद। शहर के लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने की कवायद जीडीए ने शुरू कर दी है। जीडीए वीसी ने इसके लिए योजना तैयार कर ली है। योजना के अनुसार शहरी क्षेत्र में स्थित नगर निगम और जीडीए के सभी पार्कों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा।
इसके लिए करीब 21 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शुरूआत जीडीए अपने पार्कों से करेगा। पहले चरण में शहरी क्षेत्र के सात पार्कों को चिन्हित किया गया है।
करीब दो दशक पहले तक गाजियाबाद शहरी क्षेत्र में 40 से 50 फीट की गहराई पर पानी उपलब्ध था।
इसके बाद गाजियाबाद में विकास के नाम पर तेजी से कंक्रीट का जंगल फैलने लगा। इंदिरापुरम योजना से शुरू हुए विकास के बाद शहर के चारों और ऊंची-ऊंची इमारतें बननी शुरू हो गईं। जहां कभी खेत-खलिहान हुआ करते थे, वहां कालोनी बसा दी गईं।
बड़ी संख्या में नई सड़कों का निर्माण हुआ। इमारतों को बनाने में भूजल का जमकर दोहन हुआ, मगर कंक्रीट का जंगल बनने से बरसात का सारा पानी वापस धरती के अंदर नहीं जा सका। यही कारण रहा कि साल दर साल भूजल स्तर गिरता ही चला गया और धरती की कोख सूखने लगी।
वर्तमान में हालत यह है कि पुराने शहर में वॉटर लेबल जहां 150 फीट तक पहुंच गया है, वहीं टीएचए में यह 200 मीटर तक जा पहुंचा है। गिरते भूजल स्तर ने पर्यावरण विशेषज्ञों की भी नींद उड़ा दी है। इसी के चलते अब जीडीए ने शहर के ग्राउंड वाटर लेबल को सुधारने की कवायद शुरू कर दी है।
जीडीए वीसी कंचन वर्मा के अनुसार ग्राउंड वॉटर रिचार्ज के लिए नगर निगम के सभी 1250 और जीडीए के 152 पार्कों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा। प्रत्येक सिस्टम को लगाने में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे।
यानी कुल मिलाकर करीब 21 करोड़ से ज्यादा खर्च करने होंगे। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग इसमें निर्माण संस्था की भूमिका निभाएगी। जीडीए के उद्यान अधिकारी एसपी शिशौदिया ने बताया कि शुरूआती दौर में जीडीए ने अपने पार्कों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने की कवायद शुरू कर दी है।
इसके लिए सात स्थानों को भी चिन्हित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मधुबन बापूधाम योजना में 28 एकड़ के पार्कों में 3, इंदिरापुरम के ग्रीन पार्क में 2 और राजनगर सेक्टर-23 के शिल्प उद्यान में 2 स्थानों पर वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना तय कर दिया गया है।