शहर में कूड़ा लिफ्टिंग में भी तेल का ‘खेल’ चल रहा है। यह खेल बड़े ही गुपचुप तरीके से खेला जा रहा है। शहर में प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन कचरे को कागजों में 900 टन दिखाया जा रहा है। 200 टन कचरे की लिफ्टिंग के लिए अतिरिक्त डीजल भी लिया जा रहा है। अब हड़ताल के बाद नगर निगम ने ड्राइवर बदले तो इस खेल का खुलासा हुआ।
10 दिन पहले तक नगर निगम में पुराने ड्राइवरों के हाथों में शहर के कूड़ा लिफ्टिंग की कमान थी। निगम प्रशासन शहर से एक टीपर कचरा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए उसे 10 से 12 लीटर डीजल देता है।
निगम के वाहन प्रतिदिन प्रशासन को 900 टन कचरा उठान की पर्चियां देते थे। इसी के आधार पर निगम इस काम में लगे वाहनों को डीजल देता था। 900 टन कचरा उठाने के बावजूद शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते थे।
बीते दिनों नगर निगम प्रशासन और वाहन चालकों में विवाद हुआ तो निगम अधिकारियों ने नए ड्राइवरों को ठेके पर नियुक्ति दे दी। अब यह नए ड्राइवर सुबह से दोपहर तक की बजाय शाम तक कूड़ा लिफ्टिंग कर रहे हैं।
बावजूद इसके शहर से 700 मीट्रिक टन कचरा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच रहा है। महापौर अशु वर्मा का कहना है कि दिन भर गाड़ियां चलाने के बावजूद 700 मीट्रिक टन कचरा मिल रहा है, जबकि पूर्व में दोपहर तक वाहन चलाने के बावजूद ड्राइवर 900 टन की पर्चियां लाकर दे रहे थे।
यानी वाहन के चक्कर ज्यादा दिखाकर डीजल चोरी की जा रही थी। उनका कहना है कि इस पर रोक लगा दी गई है। आगे मानीटरिंग और कड़ी जाएगी।
ऐसे बढ़ाते थे कचरे का वजन
निगम सूत्रों के मुताबिक वाहन चालक एक टीपर में कचरा भरकर डंपिंग ग्राउंड पर ले जाते थे। इसकी तौल कराने के बाद यह इस गाड़ी से कुछ कचरा डंपिंग ग्राउंड पर उतार देते थे और बाकी कचरे से भरी गाड़ी को कही दूर ले जाकर खड़ी कर देते थे।
ढाई-तीन घंटे बाद उसी गाड़ी को फिर कांटे पर ले जाकर तौल करा देते थे। यानी एक बार गाड़ी भरकर दो तौल करा देते थे और दो चक्करों का डीजल ले लेते थे। यही वजह है कि शहर से निकलने वाला कचरा भी ज्यादा दिखाया जा रहा था।
निगम की गाड़ियों से नहीं गिरेगा कूड़ा
एनजीटी की सख्ती के चलते नगर निगम अब कूड़े को ढककर डंपिंग ग्राउंड तक ले जाएगा। निगम अपनी करीब 150 गाड़ियों के लिए तिरपाल खरीदेगा। ताकि कूड़े को ढककर ले जाया जा सके।
बृहस्पतिवार को महापौर अशु वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी व अपर नगर आयुक्त को वाहनों के लिए तिरपाल खरीदवाने और वाहनों के डालों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। पूर्व में कई पार्षद भी इसकी मांग कर चुके थे।