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शाहजहां ने बनवाई थी अपरकोट की मस्जिद

Mon, 20 Jun 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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करीब पौने चार सौ वर्ष पुरानी है मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
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लोनी। अपरकोट मोहल्ले में लखोरी ईंटों से बनी शाही कला मस्जिद मुगल काल की धरोहर है। यह मस्जिद करीब पौने चार सौ साल पहले मुगल बादशाह शाहजहां के वक्त बनाई गई थी।
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मस्जिद की दीवारें करीब चार फीट चौड़ी हैं।

कला का मतलब बड़े से होता है। इस मस्जिद को आसपास की मस्जिदों में सबसे बड़ी मस्जिद का दर्जा दिया गया है। इसमें तीन गुंबद बनी हुई हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि इसकी तामीर के वक्त यहां 60 वर्ग गज के कमरे में नमाज अदा की जाती थी।

उस वक्त सौ-सवा नमाजी रहे होंगे। मस्जिद परिसर में एक कुआं था। वुजू के लिए इसी कुएं से पानी लिया जाता था। अब कुआं सूख चुका है और बच्चों के गिरने के डर से इसे ढक दिया गया है। मस्जिद परिसर में एक विशालकाय इमली का पेड़ भी था, जिसके नीचे लोग दीन ईमान की बातें किया करते थे।
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मोहल्ले के लोगों ने पैसे जमा कर मस्जिद का सौंदर्यीकरण कराया है। अब यह करीब पांच सौ वर्ग गज में है। जिला बागपत के धनौरा निवासी हाफिज हुसैन अहमद काफी समय से यहां इमामत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जुमे के दिन यहां करीब पांच सौ अकीदतमंद नमाज अदा करते हैं।
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