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दवाई बाहर से लिखी तो होगी कार्रवाई

Wed, 29 Mar 2017 12:37 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/गाजियाबाद
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वीडियो कांफेसिंग - फोटो : अमर उजाला
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अस्पतालों में मरीजों से रुपये लिए जाने और मरीजों को बाहर से दवाएं लिखने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। इसको लेकर मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश भर के सीएमओ और सीएमएस के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर कड़े निर्देश दिए। वीडियो कांफ्रेंसिंग में मरीजों को बाहर से दवाएं न लिखने और पैसे न लिए जाने पर उनका सबसे अधिक जोर रहा।
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  स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मंत्रालय संभालने के बाद मंगलवार को पहली बार सभी सीएमओ और सीएमएस के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की और सभी चिकित्सकों को समय पर अस्पताल पहुंचने से लेकर परिसर में साफ-सफाई रखने के निर्देश दिए।

कलक्ट्रेट परिसर में गाजियाबाद के भी सभी स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। उनका सबसे अधिक जोर था कि किसी भी मामले में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायत पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी अस्पताल की मरीजों से पैसे लिए जाने की शिकायत नहीं आनी चाहिए और मरीजों को बाहर से दवाएं भी न लिखी जाए।
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विडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान दवाओं की कमी और उसके बजट के बारे में चर्चा नहीं हो पाई। इस मौके पर सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल, एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी, संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा और महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. दीपा त्यागी मौजूद रहीं।


अस्पताल में दवाएं हैं नहीं, बाहर से न लिखने के आए निर्देश
अस्पताल में पिछले दो महीने से दवाओं की किल्लत है। अब नौबत यह आ गई है कि अधिकतर मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। अब स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दे दिया है कि मरीजों को बाहर से दवा न लिखी जाए। हालांकि मंगलवार को अधिकतर मरीजों को बाहर से दवा लिखी गई थी।

एमएमजी में मंगलवार को अधिकतर मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। पर्ची में लिखी गई एकाध दवाएं ही अस्पताल से मिल पाईं बच्चों के सीरप से लेकर आई ड्रॉप सभी मरीजों  को बाहर से ही खरीदना पड़ा।

आंखों में दर्द  और पानी आने की शिकायत है मैं पिछले तीन बार से अस्पताल में आ रही हूं और मुझे हर बार बाहर से सौ रुपये का ड्रॉप खरीदना पड़ रहा है। मैं विधवा सिलाई करके अपनी जीविका चलाती हूं हर बार दवा का खर्च उठाने में बड़ी दिक्कत हो रही है।
अफसर जहां, भाटिया मोड़

बच्चे के पेट में दर्द और कमजोरी बताई है। बच्चों के लिए खून बढ़ाने की दवा बाहर से खरीदनी पड़ी है। बाहर में यह दवाएं तीन चार सौ तक में मिल रही हैं। सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवाओं की उम्मीद लेकर आए थे लेकिन यहां भी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
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आयशा,  कैला भट्टा

खांसी और कान में दर्द की समस्या थी। खांसी की दवा तो मिल गई लेकिन कान दर्द की दवा बाहर से लेनी पड़ रही है।
यति के साथ भाई, घूकना मोड़

आंखों में खुजली और पानी की समस्या थी लेकिन आई ड्रॉप यहां नहीं मिला बाहर से दवा लिखी गई है।
पूजा विजयनगर
 
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