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विधायकों को दी ब्याज में छूट तो होगा 100 करोड़ का घाटा

Tue, 07 Jun 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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भवन - फोटो : Demo pic
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मधुबन बापूधाम योजना में प्लाट पाने वाले सूबे के सौ से अधिक विधायकों को ब्याज पर छूट देने से जीडीए ने असहमति जताई है। हालांकि यह मामला अभी शासन में विचाराधीन है।यदि शासन ने यह छूट दे दी तो जीडीए को सौ करोड़ का घाटा होगा।
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दरअसल समय से किश्त न भरने वाले इन विधायकों को 15 फीसदी ब्याज चुकाना होगा। मजे की बात यह है कि विकास प्राधिकरण, नगर निगम व जिला पंचायत में व्याप्त अनियमितताओं पर अंकुश लगाने वाली विधायकों की समिति ने ही शासन से विधायकों को ब्याज पर छूट देने की मांग की थी। इससे संबंधित पत्र शासन ने जीडीए को भेजा था।

जीडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि विचार-विमर्श के बाद मई में शासन को जवाब भेजा कि अगर विधायकों को ब्याज में छूट दी गई तो आम आवंटियों को भी देनी होगी। मधुबन बापूधाम योजना में जीडीए की कुल 12 हजार संपत्तियां हैं, ब्याज माफ करने पर जीडीए को करीब सौ करोड़ रुपए का घाटा होगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस मामले में कोई निर्देश शासन की ओर से नहीं आया है।
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बता दें कि अगस्त 2010  में जीडीए ने एक स्कीम के तहत 279 विधायकों के लिए प्लाट आरक्षित किए थे।15 सितंबर 2013 तक विधायकों को प्लाट की कीमत 12 किश्तों में भरनी थी। डेढ़ सौ विधायकों ने तो समयानुसार पूरा पैसा दे दिया। बाकी ने कुछ ही किश्तें भरी जबकि 22 विधायकों ने एक भी किश्त नहीं दी। जीडीए ने इस साल 31 मार्च को ओटीएस (वन टाइम सेटेलमेंट) का आयोजन किया था, जिसमें भाग लेने वाले विधायकों को 15 फीसदी ब्याज में तीन फीसदी छूट दी जाती।

लेकिन ओटीएस में कुछ ही विधायक आए। इसके बाद विधायकों की उक्त समिति ने शासन से ब्याज पर छूट की मांग की थी।
गले की फांस बने प्लाट: ब्याज भरने वाले विधायकों के लिए प्लाट गले की फांस बन गए हैं। जीडीए सूत्रों ने बताया कि प्रति प्लाट की कीमत 38 लाख 94 हजार रुपए है। जिन विधायकों ने 12 में से आधी किश्तें भर दी हैं, अब जब वे छह किश्तें ब्याज के साथ भरेंगे तो प्लाट की कीमत करीब 62 लाख पड़ जाएगी।

इन दिनों जीडीए के विधायक प्रकोष्ठ में विधायक या उनके प्रतिनिधि यह जानने अक्सर आते हैं कि ब्याज के साथ उन्हें कितनी रकम अदा करनी होगी। भारी रकम का पता चलने पर वे पशोपेश में पड़ जाते हैं। माना यह जा रहा है कि ज्यादातर विधायक भविष्य में प्लाट बेच ही देंगे और जब बेचेंगे तो यह तय नहीं कि उन्हें फायदा होगा कि नहीं। वैसे भी दो-तीन साल के बाद ही मधुबन बसने लायक होगा।
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