नोट बंदी के असर से प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ गया है। हालत यह है कि होम डिलीवरी करने वाले ऑनलाइन कंपनियों के डिलीवरी ब्वॉय भी अपने साथ स्वैप मशीन लेकर पहुंच रहे हैं। उधर, नोट बदलवाने केलिए बैंकाें के बाहर लोगों की लाइन शुक्रवार को दसवें दिन भी लगी रही।
केंद्र सरकार द्वारा 1000-500 के नोटों को बंद करने के बाद से ही छोटे नोटों की किल्लत होने लगी है। लोग बैंक से नोट बदलवा भी रहे हैं तो उन्हें घर में ही जमा कर रहे हैं। ऐसे में छोटे नोटों की भी किल्लत हो गई है।
इसी के चलते अब ज्यादातर लोग खरीदारी के लिए प्लास्टिक मनी यानी अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड का प्रयोग कर रहे हैं। कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा देने वाली सभी ऑनलाइन कंपनियों ने भी अब पुराने नोट लेने बंद कर दिए हैं।
हालांकि लोगों की समस्या को देखते हुए ऑनलाइन कंपनियां अपने डिलीवरी ब्वॉय के साथ ही स्वैप मशीन भी भेज रही हैं। मौके पर सामान की डिलीवरी के ग्राहकों को उनके क्रेडिट और डेबिट कार्ड स्वैप करने के बाद दी जा रही है। मॉल-मल्टीप्लेक्स के साथ ही छोटे दुकानदारों ने भी स्वैप मशीनें लगा ली हैं।
नोट बदलवाने की लिमिट घटी, पब्लिक टेंशन में
नोट बदलवाने की लिमिट शुक्रवार को कम कर दी गई। 4500 की जगह लोगों के सिर्फ 2000 रुपये ही बदले गए। पटेल नगर से नोट बदलवाने पहुंची कमलावती ने बताया कि सरकार ने जनता को परेशानी में डाल दिया है। नोट बदलने की सीमा तो बढ़नी चाहिए न कि कम होनी चाहिए।
पेट्रोल पंपों पर नहीं मिला कैश
केंद्र सरकार की घोषणा के बाद भी गाजियाबाद के पेट्रोल पंपों पर लोगों को कैश नहीं दिया गया। पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष जयवीर सिंह ने बताया कि कैश कौन लेकर आएगा, कैसे बंटेगा, कैश की जिम्मेदारी किस पर होगी, पंपकर्मी एक साथ दो काम कैसे कर सकेंगे।
इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। कंपनी की ओर से भी इस संबंध में कोई गाइडलाइंस नहीं आई है और न ही ई-मेल।
कुछ ही बैंकाें से मिला 500 का नया नोट:
सरकार द्वारा जारी 500 के नए नोट शुक्रवार को कुछ बैंक और उनकी एटीएम से निकले। एसबीआई के रीजनल मैनेजर एसके गोयल ने बताया कि बैंक के जितने एटीएम हैं, उनके सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया गया है।
एटीएम से 2000 का नया नोट भी ग्राहकों को दिया जा रहा है। उधर, 500 का नया नोट ओबीसी बैंक में दिया गया। 500 का नोट आने पर ग्राहकों की भीड़ आने वाले कुछ दिनों में कम हो जाएगी।
वहीं कैश खत्म होने से अंबेडकर रोड स्थित एचडीएफसी बैंक, देना बैंक, नवयुग मार्केट स्थित यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया में दोपहर को ही कैश खत्म हो गया।
सिविल डिफेंस ने संभाली व्यवस्था
बैंकों के बाहर लगी भीड़ को संभालने के लिए सिविल डिफेंस के वालंटियर भी लगे हुए हैं। राकेश मार्ग स्थित यूको बैंक के चीफ मैनेजर एचएल मीणा और सिविल डिफेंस के प्रीतम लाल ने बताया कि वालंटियर के सहयोग से कैश वितरित करने में परेशानी नहीं हो रही है।
एक-एक करके ग्राहकों को अंदर भेजा जाता है। सीनियर सिटीजन और महिलाओं की लाइन अलग बनाई गई है। कोशिश यही रहती है कि लाइन में खड़े सभी लोगों को कैश मिल जाए।
कुछ ही एटीएम रहे चालू
दसवें दिन भी कई एटीएम ने धोखा दिया। शहर के अधिकांश एटीएम बंद ही पड़े थे। एक्सिस, एसबीआई, सेंट्रल बैंक, एचडीएफसी, बैंक ऑफ बडौदा के कई एटीएम से ग्राहक कैश निकाल रहे थे।
बैंक के बाहर लोगों और पुलिस में धक्का मुक्की
खिमावती और रावली गांव में खाताधारक को सिर्फ दो हजार रुपये दिए जाने पर हंगामा हुआ। खिमावती में लाइन में लगने को लेकर लोगों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की हुई। इसमें एक पुलिसकर्मी का मोबाइल भी टूट गया।
लोगों ने आरोप लगाया है कि बैंक में दलाल सक्रिय है और उन्हीं के काम हो रहे है। मुरादनगर एसओ आरपी शर्मा ने बताया कि भीड़ के चलते मेन रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा, ओरियंटल बैंक, पीएनबी, रेलवे रोड स्थित एसबीआई, हाईवे स्थित एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक के बाहर बैरिकेंडिग लगाई गई है।
शादी के लिए नहीं मिला ढाई लाख
शादी के लिए ढाई लाख तक की नगदी बैंक से निकालने की घोषणा तो केंद्र सरकार ने कर दी, मगर यह आदेश शुक्रवार को बैंकों तक नहीं पहुंचा। ऐसे में परेशान लोग बैंकों और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटते रहे।
एडीएम प्रशासन के पास शुक्रवार को ऐसे कई लोग पहुंचे जो अपने बच्चों की शादी के लिए ढाई लाख रुपये बैंक से निकालना चाहते थे। बता दें कि बृहस्पतिवार को ही केंद्र सरकार ने शादी वाले परिवारों को राहत देते हुए घोषणा की थी कि ऐसे परिवार का कोई भी एक सदस्य (माता-पिता या जिसकी शादी है वह खुद) अपने बैंक खाते से ढाई लाख रुपये तक निकाल सकता है।
इस घोषणा के चलते शुक्रवार सुबह से ही लोगों ने बैंकों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। वहीं, बैंक अधिकारियों का कहना था कि अब तक उनके पास इस संबंध में कोई आदेश नहीं पहुंचा है। ऐसे में लोगों को ढाई लाख रुपये देने से साफ मना कर दिया गया।
बैंकों से निराश होकर लोग प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचे और गुहार लगाई। मसूरी थाना क्षेत्र के गांव नायफल में रहने वाले रतनलाल शुक्रवार सुबह एडीएम प्रशासन ज्ञानेंद्र सिंह से मिले। रतनलाल का कहना था कि 26 नवंबर को उसके बेटे नैपाल की शादी है।
ऐसे में उसे ढाई लाख रुपये कैश की आवश्यकता है। रतनलाल ने अपने प्रार्थना पत्र के साथ ही शादी का कार्ड और अपने पैनकार्ड की फोटोस्टेट कापी भी लगाई है। एडीएम प्रशासन ने बताया कि एक ही दिन में उनके पास छह-सात लोग इसी तरह शादी के लिए बैंकों से नगदी दिलवाने की गुहार लेकर पहुंचे थे, मगर अभी तक कोई आदेश न पहुुंचने से उनके आवेदन लेकर रख लिए गए हैं। आदेश आने पर उन्हें निश्चित ही निर्धारित रकम दिलाई जाएगी।
उधर मुरादनगर में भी कैश न मिलने पर एक परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई है। काकड़ा गांव निवासी सुवेत कुमार का ओबीसी बैंक में खाता है। 30 नवंबर को बेटी अंशु की शादी है। शुक्रवार को सुवेत शादी का कार्ड लेकर ओबीसी बैंक से ढाई लाख रुपये निकालने पहुंचा।
बैंक अधिकारी ने शादी का कार्ड देखने के बाद भी सिर्फ ढाई हजार रुपये दिये। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस से की। गांधी कालोनी निवासी दिनेश कुमार की बेटी अंजलि की शादी 23 नवंबर की है।
दिनेश कुमार ने बताया कि बेटी की शादी का कार्ड लेकर ओबीसी बैंक पहुंचे तो उन्होंने सिर्फ तीन हजार रुपये दिये। कुम्हैड़ा गांव निवासी लीलू की बेटी नेहा की शादी 28 नवंबर की है। शुक्रवार को रावली स्थित सिंडिकेट बैंक में रुपये निकालने पहुंचे।
रुपये नहीं मिलने पर अपने घर लौट आये। इसके अलावा 20 नवंबर को रावली निवासी सरफूद्दीन की बेटी का निकाह है। गांव के पीएनबी बैंक में शादी का कार्ड दिखाने के बाद भी रुपये नहीं मिले।
‘30 नवंबर से पहले शादी वाले परिवारों को बैंक दें प्राथमिकता’
‘परिवार में शादी के नाम पर बैंकों से ढाई लाख की नगदी लेने वालों पर नजर रखी जाएगी। शादी में न लगाकर ऐसे रुपयों का कहीं और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ यह बात डीएम निधि केसरवानी ने शुक्रवार को बैंक अधिकारियों के साथ हुई विशेष बैठक में कही।
अपने कैंप कार्यालय पर आयोजित इस बैठक में डीएम ने यह भी कहा कि शादी के लिए ढाई लाख रुपये दिए जाने में उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाए, जिनके यहां शादी 30 नवंबर से पहले है।
इसके लिए लड़का-लड़की दोनों पक्षों से शादी के कार्ड के साथ शपथपत्र और केवाईसी आदि प्रपत्र लिए जाएं। लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर आरएस मीणा ने बताया कि बैंक प्रबंधक यही चाहते हैं कि सभी को जरूरत के हिसाब से कैश मिल जाए।
इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाता है। नोटबंदी के बाद से अचानक बढ़ी भीड़ के बाद बैंकों का कामकाज भी बढ़ गया है। उन्होंने यह मामला भी उठाया कि आरबीआई ने बैंकों का समय सुबह 10 से शाम 4 बजे तक निर्धारित कर रखा है।
इस पर डीएम ने निर्देश दिया कि बैंकों के वर्किंग में आरबीआई के नियमों का ही पालन किया जाए। बैठक में एडीएम प्रशासन ज्ञानेंद्र सिंह, एडीएम सिटी प्रीति जायसवाल, एसपी सिटी सलमान ताज, बैंक अधिकारी सुनील गोयल आदि भी उपस्थित रहे।