आरटीई के तहत इस सत्र के लिए कुल 6306 बच्चों ने आवेदन किया। 36 बच्चे डुप्लीकेट मिले। 6270 बच्चे प्रवेश के लिए फाइनल किए गए। इसमें से शिक्षा विभाग का दावा है कि अभी तक 4206 बच्चों को प्रवेश दिलाया जा चुका है। 1314 बच्चों को मनचाहा स्कूल नहीं मिलने से उन्होंने प्रवेश लेने से इंकार कर दिया। 152 बच्चों को स्कूलों ने प्रवेश देने से मना कर दिया। 132 बच्चों को दूसरे वार्ड के चक्कर में प्रवेश नहीं मिल पाया। 66 बच्चों ने स्कूल से संपर्क नहीं किया। 109 बच्चों के प्रमाण पत्र में त्रुटि पाई गई है। 70 बच्चे आय से अधिक वाले मिले हैं। 46 बच्चों को स्कूलों ने सीट फुल होने का बहाना बनाकर प्रवेश नहीं दिया। इस प्रकार कुल 1644 बच्चों को अभी तक प्रवेश दिलाने में विभाग नाकाम रहा है।
इस संबंध में आरटीई इंचार्ज राकेश कुमार का कहना है कि 30 स्कूलों को कई बार नोटिस भेजा गया, लेकिन उनमें से छह स्कूलों ने तो एक भी बच्चे को प्रवेश नहीं दिया और अन्य ने आवंटित सीटों से कम को प्रवेश दिया। इसकी मान्यता रद्द करने के लिए शासन को भी लिखा गया है। बीएसए ओपी यादव का कहना है कि बचे बच्चों को भी प्रवेश दिलाया जाएगा। जो अभिभावक आ रहे हैं, उनकी पूरी सहायता की जा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद की कमेटी के सामने भी इस मुद्दे का उठाया गया है। गौर है कि डीएम और सीडीओ भी इन स्कूलों संग बैठक कर चुके हैं, फिलहाल कोई समाधान नहीं निकला है।