गाजियाबाद। जवानी में चेन लूटने का लगा दगा 31 साल बाद बुढ़ापे में धुला। लूट का दंश झेला रहा दूसरा साथी नंदकिशोर दुनिया से चला भी गया। मामले की अंतिम सुनवाई सिविल जज त्वरित न्यायालय की न्यायाधीश सुमन सोलंकी की अदालत में हुई। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष जगबीर के खिलाफ दोष साबित करने में असफल रहा। इसलिए संदेह का लाभ देते हुए जगवीर के चेन लूट के आरोप से बरी किया जाता है।
यह थी घटना
कविनगर थाने में एक महिला ने 26 जुलाई 1993 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने रिपोर्ट में बताया था कि घटना वाले दिन सुबह करीब 10:30 बजे वह इंग्राहम इंस्टीट्यूट से अपने घर कविनगर रिक्शा से आ रही थीं। इस दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्तियों ने उनसे चेन लूटने का प्रयास किया। उनसे बचने के चक्कर में महिला गिर गई और शोर मचाया। महिला ने बताया कि जिन दो लोगों ने उनके साथ घटना की वह 30 से 35 साल की उम्र के थे। उन्होंने एक मोटरसाइकिल
नंबर भी बताया। पुलिस ने महिला की शिकायत पर जगबीर और नंदकिशोर नामक दो युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद दोनों ने अदालत से अपनी जमानत कराई। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान नंदकिशोर की मृत्यु हो गई थी।