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Ghaziabad News: समन तामील कराने गए सिपाही से मारपीट, पुलिस चौकी तक घसीटा

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लोनी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) न्यायालय से लोनी बॉर्डर स्थित जवाहर नगर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक लक्ष्मण प्रसाद के खिलाफ जारी समन तामील कराने पहुंचे सीबीआई सिपाही वीरी सिंह से लक्ष्मण प्रसाद और उसके बेटे दीपक कुमार ने जमकर मारपीट की। इसके बाद गिरेहबान पकड़कर खींचकर पुलिस चौकी तक ले गए। यहां तक कि चौकी प्रभारी के सामने भी मारपीट का प्रयास किया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। वहीं बीएनएस के तहत लूट के प्रयास की धारा 309 (2), चोरी का प्रयास 317 (2), जानबूझकर चोट पहुंचाने के लिए 115 (2), सरकारी कर्मी को काम करने से रोकने व आपराधिक बल का इस्तेमाल करने के लिए 121 (1), 132 और 126 (2) में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
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एसीपी अंकुर विहार अजय कुमार सिंह ने बताया कि लक्ष्मण प्रसाद शिक्षक और उनका बेटा दीपक बेरोजगार हैं। लक्ष्मण प्रसाद सीबीआई कोर्ट में चल रहे भ्रष्टाचार के एक मामले में गवाह हैं। न्यायालय से गवाही देने के लिए पहुंचने का समन जारी हुआ था। बृहस्पतिवार शाम सीबीआई सिपाही वीरी सिंह समन तामील कराने उनके घर पहुंचे थे। पहले लक्ष्मण सिंह के बेटे दीपक ने सिपाही से बदतमीजी करते हुए मारपीट की। इसके बाद सिपाही ने जब अपना पहचान पत्र दिखाया तो उसे छीनने की कोशिश करने लगे। विवाद होता देख सिपाही ने डायल 112 पर फोन करने के लिए मोबाइल निकाला तो दीपक ने मोबाइल छीनकर कॉल काट दी। इसके बाद पिता-पुत्र ने फिर मारपीट शुरू कर दी। तभी सिपाही का कॉलर पकड़कर करीब 250 मीटर दूर स्थित गुलाब वाटिका चौकी तक खींचकर ले गए। यहां पहुंचने पर चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सिपाही को छुड़वाया, लेकिन चौकी प्रभारी के सामने ही पिता-पुत्र सिपाही को पीटने की कोशिश करने लगे। चौकी प्रभारी ने बीच-बचाव कर सिपाही वीरी सिंह को बचाया और आरोपियों को पकड़ा। एसीपी अजय कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा कर गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया कि आगे की कार्रवाई जारी है।

जालसाज के भुलावे में मारपीट की बात कही
एसीपी अजय कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी पिता-पुत्र से पूछताछ की गई तो उन्होंने भुलावे में आकर ऐसा करने की बात कही। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें सिपाही के फर्जी होने का शक हुआ था। तब उन्होंने उसके साथ मारपीट की थी। वहीं एसीपी का कहना है कि फर्जी या जालसाज होने का शक था तो ऐसी स्थिति में पिता-पुत्र को सत्यापन का सही रास्ता अपनाना चाहिए था। हालांकि सिपाही केवल गवाही का समन तामिल कराने और उसकी एक प्रतिलिपि पर रिसीविंग देने की बात कह रहा था।
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