अब मीटर रीडर मन मुताबिक रीडिंग भरकर बिजली बिल नहीं भेज सकेंगे। यदि रीडर ने घर जाए बिना ही फर्जी रीडिंग मशीन में फीड की तो स्थानीय अधिकारियों के साथ लखनऊ में बैठे अफसरों को भी पता चल जाएगा।
पावर कारपोरेशन ने मीटर रीडरों को नई कंपनी की मशीनें देने की प्लानिंग की है। इन हैंड हैल्ड मशीनों में जीपीएस और कैमरा लगा होगा। मीटर रीडर जैसे ही इसमें रीडिंग फीड करेगा उसकी लोकेशन कारपोरेशन के सर्वर पर आ जाएगी।
स्थानीय स्तर पर अधिकारी मीटर रीडरों की लोकेशन भी देख सकेंगे। अगर रीडर ने उपभोक्ता के घर जाए बिना रीडिंग फीड की तो उसकी लोकेशन और उपभोक्ता के पते में अंतर आ जाएगा, इससे फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा।
प्राइवेट कंपनी करेगी बिलिंग
रीडिंग कलेक्शन और बिल बांटने का काम पावर कारपोरेशन ने प्राइवेट कंपनी को दे रखा है। ऐसे में इन प्राइवेट फर्म को यह मशीनें खरीदनी होंगी। सिटी सर्किल में करीब 300 मशीनें खरीदी जाएंगी।
फोटो भी खींचना होगा
मीटर रीडिंग में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए मीटर रीडरों को मशीन में लगे कैमरे से फोटो खींचकर सर्वर पर भेजना होगा। इसके चलते मीटर रीडर को हर महीने उपभोक्ता के घर जाना ही होगा। मीटर में आई रीडिंग दूसरी बार नहीं दर्शायी जा सकेगी।
पावर कारपोरेशन के काम में पारदर्शिता के लिए नई और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीपीएस से लैस हैंड हैल्ड मशीनें खरीदने के लिए निजी कंपनियों को निर्देश दे दिए गए हैं। नई मशीनें आ जाने के बाद मीटर रीडिंग में न तो रीडर और न ही उपभोक्ता गड़बड़ी कर सकेगा। - एसबी यादव, अधीक्षण अभियंता