साहिबाबाद। आवास विकास परिषद की ओर से शुक्रवार को सात सोसायटियों में बकाया जमा न करने पर सीलिंग की कार्रवाई का नोटिस चस्पा किया गया। आविप के इस नोटिस से सोसायटियों में रहने वाले करीब एक हजार से अधिक लोगों की चिंता बढ़ गई है जो अपनी जीवन भर की जमा पूंजी फ्लैट खरीदने में लगा चुके हैं।
आविप के बकायदारों में दो बिल्डर ऐसे हैं जिन पर सौ करोड़ से अधिक का बकाया है। हैरत की बात यह है कि इन बिल्डरों ने ग्रुप हाउसिंग बनाई जिनमें 200 से अधिक फ्लैट हैं। गार्डेनिया इंडिया लिमिटेड और फ्यूटेक प्राइवेट लिमिटेड दोनों बिल्डरों ने ग्रुप हाउसिंग बनाई हुई है।
गार्डेनिया ग्लैमर और गार्डेनिया गीतांजली नाम से वसुंधरा में दो अलग-अलग सोसायटी है, जिनमें 500 से अधिक फ्लैट हैं। हैरत की बात यह है कि बिल्डर चोरी छिपे तहसील में आवंटियों की रजिस्ट्री भी कर रहे हैं। यह सब कुछ पिछले दो दशक से चल रहा है लेकिन आविप अधिकारियों ने कभी इतनी सख्ती नहीं दिखाई।
गार्डेनिया निवासी तपन भारती ने बताया कि वह लोग अपनी जमा पूंजी अपने फ्लैटों में लगा चुके हैं और अब आविप संपत्ती सील करने की बात कह रहा है, इस सीलिंग से बिल्डर की बजाय आम जनता ही प्रभावित होगी। गार्डेनिया निवासी मनीष त्यागी का कहना है कि एक वर्ष पूर्व भी नोटिस चस्पा किया गया था। इसके बाद बिल्डर ने कई लोगों की फर्जी रजिस्ट्री कर दी, तब भी आवास विकास परिषद के अधिकारी कुछ नहीं कर सके, अब सीलिंग की बात कह रहे हैं। आवंटियों ने कहा कि परिषद यदि सीलिंग की कार्रवाई करता है तो वह लोग कोर्ट से लेकर सड़क तक अपनी आवाज उठाएंगे।
पूर्व में भी आविप अधिकारी समय-समय पर नोटिस जमा करते रहे हैं। परिषद अपनी वेबसाइट पर हमेशा लोगों को आगाह करता है और किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले पूछताछ करने की सलाह देता है। अनिल कुमार सिंह, उप आवास आयुक्त, मेरठ जोन
नोटिस चस्पा होने के बाद सहकारी समिति पदाधिकारी पहुंचे कार्यालय
नोटिस चस्पा करने के बाद सभी बकायदार व उनके प्रतिनिधि आवास विकास परिषद कार्यालय पहुंचे और रकम जमा करने की समायाविधि को जाना। आवास विकास परिषद के संपत्ति प्रबंधक पीएस रावत ने बताया कि नोटिस चस्पा होने के बाद शुक्रवार शाम से ही लोगों के फोन आने लगे और वह अपना बकाया कम अधिक की बात करने लगे।
कुछ समिति पदाधिकारियों ने आविप की ओर से बताए गए बकाया रकम को अधिक बताया और अपने रिकॉर्ड के मुताबिक कम बकाया होने की बात कही। संपत्ति प्रबंधक ने बताया कि ऐसे बकायदारों को कहा गया है कि उनके हिसाब से जितना बकाया है, पहले वह उतना ही जमा करें, इसके बाद जमा और बकाया रकम का हिसाब किया जाएगा। बकायदारों को ओटीएस के तहत भी आवेदन करने को कहा गया ताकि उन्हें कुछ छूट मिल सके।