गाजियाबाद। मध्य पूर्वी देशों में तनावपूर्ण स्थिति होने की वजह से जिले से निर्यातित वस्तुओं के निर्यात में समस्याएं आ रही हैं। इसकी वजह से उद्यमियों को करीब 1500 करोड़ रुपये का निर्यात बाधित होने का भय सता रहा है। वहीं, कुछ निर्यातकों का आर्डर के बाद होने वाले भुगतान में भी देरी हो रही है।
जिले की इकाइयों से मध्य पूर्व के देशों को डेयरी, खाद्य उत्पादों, कॉस्मेटिक्स, मशीनरी पार्ट्स, दवाओं आदि का निर्यात प्रमुख रूप से किया जाता है। उद्यमियों के अनुसार खाद्य सामग्री में आटा, तेल, दाल, मसालों समेत अन्य उत्पादों का निर्यात होता है। इसके साथ ही घी, मक्खन, ब्रेड आदि भी निर्यात किए जाते हैं। करीब एक हजार करोड़ रुपये का निर्यात खाद्य उत्पादों का ही किया जाता है। वहीं, करीब 200 करोड़ रुपये का प्रति वर्ष दवाओं के निर्यात से कारोबार होता है। दूसरी ओर मशीनरी पार्ट्स और रेडीमेड गार्मेंट के निर्यात से करीब 300 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा है। लेकिन गत दिनों से इन देशों में लगातार राजनीतिक और वाणिज्यिक तनाव की वजह से जिले के उद्यमियों को नए आर्डर बहुत कम आ रहे हैं। ऐसा भी हो जा रहा है कि निर्यातित माल का भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा है। उद्यमियों के अनुसार अगर तीन माह में स्थिति सामान्य नहीं होती है तो वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बाजार की तलाश की आवश्यकता पड़ सकती है।
एक हजार करोड़ से अधिक का सालाना होता है निर्यात
उद्यमी राकेश अनेजा ने बताया कि जिले से अलग-अलग इकाइयों से एक हजार करोड़ से लेकर 1500 करोड़ रुपये का निर्यात होता है लेकिन इस तनावपूर्ण की स्थिति की वजह से अब निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। जिले से निर्यातित उत्पादों का उद्यमियों को देरी से भुगतान हो रहा है।
तनाव दूर होने का उद्यमियों को इंतजार, रोजगार भी हो सकता है प्रभावित
आईआईए के सचिव नीरज सिंघल ने बताया कि मध्य पूर्व में इस समय स्थिति तनावपूर्ण है। इसी वजह से उद्यमियों को कारोबार प्रभावित होने का भय सता रहा है। लंबे समय तक निर्यात प्रभावित होने से रोजगार भी प्रभावित होने का भय है।