गाजियाबाद। नौ वर्ष पहले पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने के प्रयास के दोषी नितेश उर्फ नितिश को दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के न्यायाधीश भारत सिंह यादव ने दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड से मिली पूरी धनराशि के अलावा शासन से आर्थिक क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का आदेश दिया। अदालत ने बच्ची के बयान को अहम मानते हुए सजा सुनाई, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची से दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी।
लोनी बार्डर थाने में एक व्यक्ति ने छह फरवरी 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया था कि उनके मकान में बिहार के भागलपुर धोंगा निवासी मजदूर नितेश काम रहा था। घटना के समय उनकी पत्नी की नींद आ गई और वह स्वयं बाजार सामान खरीदने चले गए थे। वापस आने पर उनकी पांच वर्षीय बेटी मां को बता रही थी कि जो अंकल हमारे यहां काम कर रहे हैं, वह मुझे ऊपर छत पर ले गया था। कपड़े उतार दिया था। पापा की आवाज सुनकर उसने बच्ची को छोड़ दिया और कपड़े पहना दिए। उस समय दोपहर के करीब 3.30 बजे थे। यह सुनकर व्यक्ति ने घर में काम कर रहे मजदूर को ऊपर से नीचे आते समय मकान के चौक में पकड़ कर पूछा तो भागने लगा। उसे दौड़ाकर पकड़ लिया और पिटाई करने के बाद ले आया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान छह गवाह और दस साक्ष्य अदालत में पेश किए थे। बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि कोई भी प्रत्यक्ष गवाह नहीं है, मेडिकल रिपोर्ट में भी पुष्टि नहीं हुई है। मजदूरी के रुपये नहीं देने पर अभियुक्त को गलत फंसाया गया है। अदालत ने निर्णय में कहा कि बचाव पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि मजदूरी को लेकर विवाद हुआ था।