पहले चरण की आखिरी चुनावी सभा में प्रधानमंत्री मोदी शायराना अंदाज में (दाल में कुछ काला है, ज़मीनों का घोटाला है) जैसी तुकबंदी कर सपा और भ्रष्टाचार को कोसते नजर आए।
उन्होंने भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए युवाओं का आह्वान किया तो आम आदमी की समस्याओं से जुड़ते हुए बिल्डरों की मनमानी से लेकर छोटे व्यापारियों की परेशानी तक को खत्म करने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने विकास के मुद्दे पर सपा के दावे पर सवालिया निशान से भाषण की शुरुआत की। इस मौके पर मोदी ने विकास के एजेंडे पर भी अपना रुख साफ किया। अब तक हुई चुनावी सभाओं में यह पहली बार था जब पीएम ने प्रदेश सरकार से पांच साल के कामकाज का हिसाब मांगा और 2019 में अपने कार्यकाल का हिसाब देने की बात कही।
पीएम ने सपा को निशाने पर लेते हुए जीडीए की सीएजी ऑडिट न कराने की सीएम की जिद, उत्तम प्रदेश के बहाने यूपी में गुंडाराज और मुख्यमंत्री के परिवार की आतंरिक कलह का जिक्र कर सपा कॉग्रेस गठबंधन को कटघरे में खड़ा किया।
पीएम ने महिला सुरक्षा के मसले और लचर कानून व्यवस्था के मामले में प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया। कहा कि इस स्थिति की वजह सपा के भाड़े के गुंडे हैं। रैली के संबोधन से साबित हो गया कि प्रधानमंत्री प्रचार के आखिरी दौर में हर कीमत पर प्रदेश की अराजक व्यवस्था के बहाने जनता की नब्ज टटोलते की कोशिश कर रहे हैं।
यही वजह है कि उनके एलान भी प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति की छवि से इतर विकास और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते नजर आए। फिर बात बीजेपी के सत्ता में आने पर सभी अथॉरिटी के सीएजी ऑडिट की हो या फिर नौकरियों में वर्ग विशेष के लाभ के चलते जांच की।
तीखे तेवरों में मोदी ने मायावती के शासन काल के अफसर जो अखिलेश सरकार में भी छाए रहे, का मुद्दा उठाकर साफ कर दिया कि यादव सिंह पर सीबीआई का शिंकजा भाजपा के एंटी भ्रष्टाचारी मुहिम का ही हिस्सा है।
पीएम ने जनता को जनार्दन करार दिया और कहा कि प्रदेश सरकार को चाहिए की वो जनता के दरबार में अपने कामों का ब्यौरा दे ताकि जनता दूध का दूध पानी का पानी कर सके। भीड़ के लिहाज से ठीक-ठीक रही सभा में मोदी पूरे आत्मविश्वास से लबरेज नजर आए और अपनी शैली से अलग लोकल मुद्दों को जनता के सामने रख रैली में आए लोगों को कन्वेंस करने की कोशिश भी की।
प्रधानमंत्री का साफ संदेश था कि अगर प्रदेश को विकास, भ्रष्टाचार से मुक्ति और युवाओं को रोजगार चाहिए तो भाजपा ही एक मात्र विकल्प है। पीएम ने अपने भाषण के माध्यम से सपा पर आम जन की अनदेखी का आरोप लगाया।
इतना ही नहीं प्रदेश के किसानों को लेकर भी अखिलेश सरकार को घेरा। बीमार, बुजुर्ग, गन्ना और गेहूं के किसानों की समस्याओं को उठाकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान का हित केवल भाजपा ही कर सकती है।
मोदी की रैली से प्रत्याशियों को मिली ऑक्सीजन
मोदी की चुनावी संकल्प रैली से गाजियाबाद की पांचों विधानसभाओं पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को जैसे आक्सीजन मिल गई। इन सभी प्रत्याशियों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मतदाताओं अपील की कि वह भारी मतों से इन प्रत्याशियों को जिताएं।
इससे पहले मोदी ने माइक संभालते ही शहर सीट से प्रत्याशी अतुल गर्ग, साहिबाबाद के सुनील शर्मा, लोनी से नंदकिशोर गुर्जर, मुरादनगर से अजितपाल त्यागी और धौलाना से डा. रमेशचंद तोमर को अपने पास ही बुला लिया।
रैली में उमड़ी भीड़ और मोदी के भाषण से इन सभी प्रत्याशियों को जैसे ऑक्सीजन मिल गई। रैली के बाद सभी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के चेहरे खिले नजर आए।
मोदी के मंच पर भी दिखी पार्टी की फूट
मोदी के मंच से लेकर उनकी दर्शक दीर्घा तक भाजपा की फूट नजर आई। मोदी के साथ ही मंच साझा करने वाले दो केंद्रीय मंत्री वीके सिंह और डा. महेश शर्मा के बीच भी तल्खी साफ नजर आई। दोनों ने मंच पर आपस में कोई बात नहीं की।
इसके अलावा भाजपा के कुछ ऐसे नेता भी थे, जिन्हें वरिष्ठ होने के बावजूद मंच पर जगह नहीं मिल सकी। जबकि उनसे काफी जूनियर रहे कई नेता मंच पर मोदी के साथ दिखे।
भाजपा के महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत ही पदाधिकारियों को मंच पर जगह दी गई थी।
मंच के लिए पहले से ही सूची तैयार की गई थी। तीन कैटेगिरी के तहत यह सूची तैयार की गई थी। इसमें कुछ पदाधिकारियों को हैलीपैड पर तैनात किया गया था, जबकि कुछ को स्वागत का कार्य सौंपा गया था।
छोटे व्यापारियों को राहत, ‘मगरमच्छों’ को मंच से दी चेतावनी
नोटबंदी के माध्यम से काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे व्यापारियों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। उनके निशाने पर बडे़ ‘मगरमच्छ’ हैं।
सरकारी पदों पर बैठे करोड़पति बाबू, नेता, मंत्री, माफियाओं को इस स्ट्राइक से डरने की जरूरत है। उन्हें किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि किसी भी छोटे व्यापारी को परेशान नहीं किया जाएगा।
कोई भी इनकम टैक्स अफसर उनके घर नहीं जाएगा। व्यापारी सिर्फ ईमेल और एसएमएस के माध्यम से ही आयकर अधिकारी से अपने सवाल-जवाब कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि काले धन पर कार्रवाई का ही यह असर है कि कर्नाटक के एक मंत्री के घर से ही 150 करोड़ रुपये बरामद किए गए थे। उनका यह अभियान अभी जारी रहेगा।
जमीन और फ्लैट के नाम पर धोखा नहीं दे सकेंगे बिल्डर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीआर की जनता के दर्द पर मरहम लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार आने के मात्र ढाई साल के अंदर ही बिल्डरों पर शिकंजा कसते हुए ‘रेरा’ बिल पास कर दिया। उन्होंने कहा कि गरीब जनता अपना एक अदद मकान बनाने में जिंदगी भर की कमाई लगा देता है।
पिछले तीन दशक से बिल्डर जनता की कमाई को लेकर उसे बेवकूफ बनाने का काम करता चला आ रहा था। पैसा लेने के बाद कभी तीन साल तो कभी पांच साल में मकान देने का वादा करता था। अब ऐसा नहीं होगा।
उनकी सरकार ने रियल एस्टेट बिल पास करके लोगों को न केवल राहत दी है, बल्कि बिल्ड़रों पर शिकंजा भी कसा है। अब अगर कोई बिल्डर तय समय सीमा में फ्लैट पर कब्जा नहीं देगा, तो उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
अभी आपकी बारी...मैं 2019 में दूंगा हिसाब
अपने प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी सभा करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से ही यूपी के सीएम अखिलेश यादव से हिसाब मांग लिया। मोदी ने कहा कि मेरा तो अभी मात्र आधा ही कार्यकाल हुआ है और सपा-बसपा-कांग्रेस मुझसे हिसाब मांग रहे हैं। इसके लिए मुझे गालियां दी जाती हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे चाहे कितनी भी गालियां दो, मगर अखिलेश को अपने पांच साल का हिसाब तो जनता को देना ही चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद भी 2019 में अपने कार्यकाल का एक-एक हिसाब देंगे।
भर्ती घोटाले की होगी जांच, हकदारों को ही मिलेगी नौकरी
यूपी में भर्ती घोटाले का मुद्दा भी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में उठाई। उन्होंने कहा कि टॉपर छात्र को भी यूपी में सरकारी नौकरी नहीं मिल पाती। लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू पास करने के लिए यूपी में अभ्यर्थी नेताओं से कनेक्शन तलाशने लगते हैं।
इंटरव्यू से पहले नेताजी से पहचान में ही काला धन चलता है। नोटों के बंडल के बदले उन्हें नौकरी मिलती है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपी में नाम और क्षेत्र देखकर नौकरी दी जाती हैं। तीस सेकेंड में ही एक अभ्यर्थी का इंटरव्यू हो जाता है। सिर्फ नाम, जाति और क्षेत्र का नाम जानने भर से ही नौकरी देने वाला विज्ञान उनकी समझ से परे है।
युवाओं को कमाई, बच्चों को पढ़ाई, बुजुर्गों को मिलेगी दवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 50 मिनट के भाषण में सभी वर्ग के हितों की बात करके वोटरों को साधने का प्रयास किया। यूपी और भाजपा शासित प्रदेशों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लड़ाई सिर्फ वोट और सरकार बनाने की नहीं, विकास और विनाश के बीच है।
भाजपा के शासन वाली सरकारों में व्यवस्थाएं देख लीजिए और पांच साल सत्ता चला चुकी सपा के शासन वाले इस उत्तर प्रदेश की व्यवस्थाएं देख लीजिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘किसानों को सिंचाई, नौजवानों को कमाई, बच्चों को पढ़ाई और बुजुर्गों को दवाई’ समय पर मिले, इसका इंतजाम करेंगे।
उन्होंने कहा कि यूपी में पांच साल लोगों ने देख लिया प्रदेश विनाश के रास्ते पर जा रहा है। अब समय आ गया है कि प्रदेश के नौजवान, किसान, महिलाएं और बुजुर्ग प्रदेश और अपने भविष्य को बदलें। उन्होंने सभी वर्गों के लोगों को बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाते हुए सभी का साथ मांगा।
विपक्षियों से छीना मुद्दा, किसानों को दिया कर्जा माफी का भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस से किसानों का कर्जा माफी का मुद्दा भी छीन लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा। कांग्रेस ने भी अपने घोषणा पत्र में ‘किसानों का कर्जा माफ, बिजली बिल हाफ’ करने का दावा किया है।
प्रधानमंत्री ने यूपी सरकार को किसानों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि यूपी में अनाज पैदावार का सिर्फ 3 फीसदी हिस्सा सरकार खरीदती है, बाकी 97 फीसदी किसानों को बाजार में सस्ते रेट पर बेचना पड़ता है।
हरियाणा सरकार किसानों से 60 फीसदी और मध्य प्रदेश में 50 फीसदी खरीदा जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि किसान आनलाइन 500 मंडियों में अपनी फसल अच्छे दामों पर बेच सकेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के गरीबों के खाद्यान्न के लिए यूपी को 750 करोड़ रुपए देने की पेशकश की गई है, लेकिन प्रदेश सरकार अभी तक उन गरीबों की सूची ही नहीं तैयार कर पाई है, जिन्हें योजना का लाभ मिलना है। प्रदेश सरकार देख रही है कि किन लोगों ने हमे वोट नहीं दिया था। ऐसे लोगों को खाद्यान्न सपा सरकार नहीं देना चाहती।
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बंक मारकर स्टूडेंट्स पहुंचे भाषण सुनने
उम्र भले ही सियासत करने की न हो, लेकिन बच्चों में भी मोदी का क्रेज है। बुधवार को प्रधानमंत्री की जनसभा में उनका भाषण सुनने बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स भी पहुंचे।
कुछ बच्चे अपने परिजनों के साथ पहुंचे थे तो सैकड़ों की संख्या में स्कूल से बंक मारकर भी स्टूडेंट्स मोदी की रैली में पहुंचे थे। गाजियाबाद से ही नहीं पिलखुवा, मुरादनगर, मोदीनगर और साहिबाबाद से स्टूडेंट्स मोदी का भाषण सुनने पहुंचे।
मोदी की सभा में सेल्फी का क्रेज
मोदी की सभा में पहुंचे उनके समर्थकों में सेल्फी का क्रेज दिखा। महिला कार्यकर्ता, युवा और कुछ नेता मंच के सामने सेल्फी ले रहे थे। कुछ मोदी का मुखौटा लगाए हुए थे, तो अधिकांश समर्थकों की इच्छा ऐसी थी कि उनकी सेल्फी में पीछे नरेंद्र मोदी भाषण देते हुए दिखें। सेल्फी लेने के लिए लोग पहले सेल्फी स्टिक भी लेकर पहुंचे थे।
मंच पर जगह न मिलने को लेकर कई नेता नाराज दिखे
प्रधानमंत्री के मंच पर भाजपा के कई बड़े नेताओं को भी जगह नहीं मिल पाई। भाजपा के सीनियर नेता अशोक गोयल मंच पर न पहुंच पाए, जबकि उनसे जूनियर कई नेता मंच पर मोदी के साथ थे।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह भी जनसभा में पहुंचे, लेकिन मंच पर जगह न मिली। वह स्थानीय नेताओं के साथ मंच के नीचे मीडिया गैलरी में बैठे रहे। उनके अलावा नगर निगम के एक भी पार्षद को मंच पर जगह नहीं मिली। इससे नेताओं में खासी नाराजगी दिखी।
भीड़ जुटाने में मायावती पड़ी भारी
नरेंद्र मोदी की रैली में भीड़ काफी थी, लेकिन चर्चा रही कि बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली से कम थी। अब तक की सभी रैली में मायावती भीड़ जुटाने में सब पर भारी रही। उनका सभा स्थल भाजपा के सभा स्थल से काफी बड़ा था।
हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि मोदी की रैली में भीड़ ज्यादा थी। मायावती ने 9 विधानसभाओं की एक साथ रैली की थी, जबकि भाजपा ने सिर्फ पांच विधानसभा क्षेत्रों की रैली की है।