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Ghaziabad News: गढ़-मेरठ हाईवे चौड़ीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 26 नवंबर को अगली सुनवाई

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हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर से मेरठ के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-709ए के चौड़ीकरण, उन्नयन और रखरखाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और जनहित को देखते हुए दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की सलाह दी है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 20 हजार वाहनों की आवाजाही होती है, जो जर्जर सड़क के कारण परेशानी झेल रहे हैं।
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यह मामला 940.68 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट से जुड़ा है। एनएचएआई ने वर्ष 2021 में टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को गढ़मुक्तेश्वर से मेरठ के बीच 50.254 किलोमीटर लंबे एनएच-709ए के विकास का ठेका दिया था। यह कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) अनुबंध के तहत 10 अक्तूबर 2023 तक पूरा किया जाना था। एनएचएआई ने काम में देरी और सड़क के रखरखाव में कमियों का आरोप लगाते हुए कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया था।
टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध समाप्त करने के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि समझौते के अनुसार एनएचएआई को लगातार पांच-पांच किलोमीटर के हिस्सों में बाधारहित भूमि और राइट ऑफ वे उपलब्ध कराना था, लेकिन यह शर्त पूरी नहीं की गई। इस वजह से काम में देरी हुई। हाईकोर्ट ने कंपनी की दलीलों को सही मानते हुए एनएचएआई के अनुबंध समाप्त करने, बैंक गारंटी जब्त करने और नए सिरे से टेंडर जारी करने के फैसले को रद्द कर दिया था। साथ ही संयुक्त रूप से साइट का दोबारा निरीक्षण कर संशोधित समयसीमा में परियोजना पूरी करने का निर्देश दिया था।
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एनएचएआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने समझौते की धारा 10.4 का हवाला दिया। कहा कि निर्माण के दौरान मौजूदा सड़क का रखरखाव टाटा प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी थी। कंपनी को अपने खर्च पर सड़क को यातायात योग्य और सुरक्षित बनाए रखना था, लेकिन इस दौरान सड़क की हालत खराब हुई और शिकायतें मिलीं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मौजूदा हाईवे के रखरखाव के दायित्व पर सवाल उठाए।
वर्तमान में हाईवे का निर्माण अधर में लटका है और सड़क जर्जर हो चुकी है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले करीब 20 हजार वाहन चालकों को गड्ढों और टूटी सड़क के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
इधर कार्तिक गंगा स्नान मेले को लेकर प्रशासन चिंतित है। इसी मार्ग से लाखों श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली और भैंसा-बुग्गी से गढ़मुक्तेश्वर जाते हैं। गड्ढों भरी सड़क श्रद्धालुओं के लिए परेशानी बन सकती है। इसे देखते हुए डीएम कविता मीना ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर मार्ग को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं। परियोजना निदेशक साकेत मिश्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगाया है और कार्तिक मेले को देखते हुए मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
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