केस में आरोप पत्र पेश होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने परिवाद दर्ज कर डॉली को आरोपी मानते हुए समन जारी कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुमार धनंजय ने बताया कि बीएनएसएस की धारा 223 में यह प्रावधान है कि अभियोजन की तरफ से वाद दाखिल करने के बाद अभियुक्त को भी अदालत सुनेगी। बिना दोनों पक्षों की सुनवाई किए किसी भी तरह का आदेश पारित नहीं करेगी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत से जारी समन को निरस्त कर वादी के साथ ही प्रतिवादी का पक्ष सुनने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निचली अदालत को यह देखना होगा कि डॉली शर्मा के खिलाफ दर्ज मानहानि के इस प्रकरण में धारा 223 के तहत संयुक्त सुनवाई लागू होती है या नहीं। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।