शहर के एक नामचीन रेस्टोरेंट पर मिली चीनी भी सेहत के लिए नुकसानदेह मिली है। इसका सैंपल स्टेट और सेंट्रल दोनों लैब में फेल मिला है। फूड सेफ्टी विभाग अब इस रेस्टोरेंट संचालक के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में वाद दायर कराएगा। इसकी रिपोर्ट खाद्य आयुक्त को भेज दी गई है।
फूड सेफ्टी विभाग के डीओ अजय जायसवाल ने बताया कि 19 अप्रैल 2015 को टीएचए के पेसेफिक बिजनेस पार्क स्थित एक रेस्टोरेंट से चीनी का नमूना एफएसओ यदूवीर यादव और सीएफएसओ मनोज तोमर ने जांच को भेजा था। लखनऊ लैब की जांच में यह सब स्टैंडर्ड आया था, मगर रेस्टोरेंट मालिक ने दोबारा से गहन परीक्षण कराने की अपील की। इसके आधार पर दोबारा से जांच सेंट्रेल लैब कोलकाता भेजा गया। वहां से रिपोर्ट चौंकाने वाली आई है। इसमें चीनी में अनसेफ पाई गई है। यह सेहत के लिए खतरनाक है।
डीओ का कहना है कि इस मामले में अब एसीजेएम कोर्ट में वाद दायर कराया जाएगा। कोर्ट में वाद दायर कराने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त को रिपोर्ट भेजकर अनुमति मांगी गई है। अनसेफ के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा का प्राविधान है।
...
चीनी में मिली है एसओटू
सेंट्रल लैब के विशेषज्ञों ने चीनी की जांच में पाया कि इसमें सल्फर डाई आक्साइड की मात्रा जानलेवा स्तर तक मिली हुई है। चीनी बनाने के दौरान लापरवाही से एसओटू की मात्रा चीनी में रह जाती है। यह 70 पीपीएम (पार्टीकल पर मिलियन) तक मान्य है, जबकि रेस्टोरेंट की चीनी में यह 78 पीपीएम पाई गई है।
चीनी ले सकती है जान
वरिष्ठ फिजीशियन डा. अवनीश शर्मा का कहना है कि एसओटू यदि कुछ समय तक लगातार शरीर में जाता रहे तो इससे जान जा सकती है। एसओटू से किडनी और लीवर का कैंसर हो सकता है। इससे आमाशय कैंसर, ब्लड कैंसर और हाई बीपी की समस्या हो सकती है।
शुगर मिल की हो जांच
अफसरों ने खाद्य आयुक्त से शुगर मिल की चीनी की जांच कराने की सिफारिश की है। चीनी रेस्टोरेंट से केवल मिली है, वह बनी हुई एक नामचीन शुगर मिल की है। ऐसे में ज्यादा एसओटू वाली चीनी की सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए उसकी जांच जरूरी है।