केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए अब स्टूडेंट्स सहभागी बनेंगे। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर यूजीसी ने वित्तीय साक्षरता अभियान को लांच किया है। यह प्रोग्राम 12 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच चलेगा।
इसमें नोटबंदी के बाद तेजी से बदलती भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न आयामों को बताया जाएगा। स्टूडेंट्स पहले यह खुद सीखेंगे। इसके अपने वह घर और समाज का मार्गदर्शन करेंगे।
नोटबंदी के बाद से देश डिजिटल इकनॉमी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन को ज्यादा तवज्जो दे रही है। इसी कड़ी में यूजीसी ने भी पहल की है। यूजीसी ने इस संबंध में सभी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को सर्कुलर जारी किया है।
सर्कुलर के मुताबिक विकसित देशों में जिस प्रकार लोग ई-बैंकिंग के अलावा कैशलेस ट्रांजेक्शन के जो तरीके अपनाते हैं, उसे यहां भी तेजी से प्रचारित किया जाएगा।
अभियान में एक्सपर्ट स्टूडेंट्स को ई-बैंकिंग, मोबाइल एप के जरिए ट्रांजेक्शन करना, विभिन्न बैंकों की ऑनलाइन व्यवस्थाओं से स्टूडेंट्स को रूबरू कराएंगे ताकि वह पहले खुद इन तरीकों का इस्तेमाल करें।
इसके बाद अपने घर के सदस्यों व समाज के अन्य लोगों को ट्रेंड करेंगे। वित्तीय साक्षरता अभियान से पूरे समाज को डिजिटल इकनॉमी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
अभिभावकों ने डिजिटल बैंकिंग के बारे में जाना
नोटबंदी के बाद ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में आ रही समस्याओं को सुलझाने के लिए गीता संजय मेमोरियल स्कूल में शनिवार को डिजिटल बैंकिंग विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।
स्कूल में शनिवार को पेरेंट्स टीचर मीटिंग के साथ अभिभावकों के लिए कार्यशाला भी रखी गई। कार्यशाला में शालिनी सक्सेना ने अभिभावकों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के बारे में बताया।
इस दौरान अभिभावकों की ज्यादा सवाल पेटीएम के इस्तेमाल को लेकर थे। इस मौके पर स्कूल के डायरेक्टर पवन जिंदल, प्रिंसिपल अलका सिंघल, उप प्रधानाचार्य मनीष शर्मा के साथ अन्य स्टाफ मौजूद रहा।