गिरते भूजल स्तर और दूषित होते ग्राउंड वाटर पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तेवर कड़े हो गए हैं। मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे स्लाटर हाउस को बंद कराने का निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए चीफ सेक्रेटरी से रिपोर्ट मांगी है।
अब सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। स्लाटर हाउस में जहां रोजाना हजारों लीटर भूजल का अवैध रूप से दोहन हो रहा है, वहीं दूषित पानी को फिर से ग्राउंड वाटर में मिलाया जा रहा है। इससे कई शहरों में ग्राउंड वाटर पीने योग्य नहीं रहा।
एनजीटी ने इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी कि कितने स्लाटर हाउस चल रहे हैं। सात अप्रैल को एनजीटी में दी गई रिपोर्ट में इनके आंकड़े अलग-अलग हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण (सीपीसीबी) ने जहां सूबे में 126 स्लाटर हाउस चलते दिखाए हैं, वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने 179 बताए हैं।
स्लाटर हाउस के जल दोहन के बारे में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के पास रिकार्ड ही नहीं है। इसको गंभीरता से लेते हुए एनजीटी ने संबंधित एजेंसियों से नाराजगी जताई है। चीफ सेक्रेटरी से पूछा गया है कि मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे स्लाटर हाउस को क्यों न बंद करा दिया जाए? उन्होंने चीफ सेक्रेटरी को इनकी संख्या और जल दोहन के आंकड़ों के साथ 27 अप्रैल को तलब किया है।
स्लाटर हाउस में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्लाटर हाउस भूजल का दोहन और प्रदूषण दोनोें कर रहे हैं। एनजीटी को साक्ष्य दिए गए हैं। यह सब अफसरों की मिलीभगत से चल रहा है। - शैलेश चौहान, याचिका कर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता।
एनजीटी ने स्लाटर हाउस पर रिपोर्ट तलब की थी। बोर्ड के रिकार्ड केसाथ एनजीटी में पक्ष रखा जाएगा।
रोहित सचान, अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।