गाजियाबाद। ई-स्टांप व्यवस्था के विरोध में बैनामा लेखक और वकील हड़ताल पर हैं। ऐसे में तहसील और कचहरी में लोगों को ऑनलाइन व ऑफलाइन स्टांप आसानी से उपलब्ध न होने की वजह से उनके काम अटक रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत जन्म मृत्यु और संपत्ति स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वालों के सामने है। खास बात यह है कि तहसील, कचहरी के बाहर जो लोग स्टांप बेच रहे हैं, उनकी संख्या काफी कम है और वह इसके लिए तीन-चार गुना तक रकम वसूल रहे हैं।
रजिस्ट्री कार्यालय के अनुसार, मोदीनगर, लोनी और सदर तहसील में रोजाना 10 रुपये की कीमत के स्टांप की बिक्री का आंकड़ा नौ हजार से ज्यादा है। इनकी सबसे ज्यादा जरूरत जन्म मृत्यु, वारिसान प्रमाणपत्र, संपत्ति स्थानांतरण, इकरारानामा आदि जारी कराने के लिए आवेदकों को पड़ती है। 11 जून से बैनामा लेखक और अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। इसके बाद तहसीलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टांप मिलने बंद हो गए हैं। इससे इन आवेदकों के काम अधर में लटक गए हैं। बाहर जो लोग स्टांप बेच रहे है, उनका भी बैनामा लेखक और वकील विरोध कर रहे हैं। इस वजह से वह यदि किसी को चोरी छिपे स्टांप मुहैया भी करा रहे हैं तो वह इसके लिए तीन चार गुना ज्यादा रकम वसूल रहे हैं। तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने बताया कि जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र समेत अन्य कार्यों के लिए 10 रुपये के शपथपत्र की जरूरत पड़ती है, लेकिन हड़ताल की वजह से स्टांप की उपलब्धता नहीं है। इसी कारण लोग आवेदन नहीं करा पा रहे हैं।
-घट गई आवेदनों की संख्या :
कविनगर जोन के प्रभारी राजेश गुप्ता ने बताया कि बीते करीब एक सप्ताह से कार्यालय में जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र, संपत्ति स्थानांतरण आदि के आवेदनों में आधे से ज्यादा गिरावट आई। पहले रोजाना इसके लिए 10 आवेदन आते थे, जो अब कम होकर पांच से नीचे आ गई है। बेटे का जन्म प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए तहसील पहुंचे पवन शर्मा ने बताया कि तहसील में स्टांप नहीं मिला। साइबर कैफे संचालक ने 100 रुपये में स्टांप उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन कई दिन से बहकाने का काम कर रहा है। जबकि, स्कूल से रोजाना फोन कर रहे हैं कि बेटे का जन्म प्रमाणपत्र जमा करो। अन्यथा बेटे का नाम काट दिया जाएगा।
आंदोलन को दिया समर्थन
भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम संगठन के बैनर तले किसानों ने सदर तहसील में चल रहे बैनामा लेखकों और वकीलों के धरने को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों की सहमति के बिना ईस्टांप व्यवस्था को लागू करना अनुचित है। इस कार्य से बड़ी तादाद में लोगों की रोजी रोटी भी जुड़ी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अधिवक्ता व बैनामा लेखकों के साथ उनका संगठन खड़ा है। इस मौके पर संगठन के अध्यक्ष आनंद चौधरी, अजयपाल प्रमुख, प्रवीण चौधरी, रणबीर प्रधान, राकेश चौधरी आदि अनेक लोग मौजूद रहे।