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Ghaziabad News: धार्मिक स्थलों तक जासूसी का जाल, पाकिस्तान भेजे गए खाटू श्याम मंदिर के फोटो-वीडियो

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कौशांबी। जिले में पकड़ा गया जासूसी नेटवर्क देश के सैन्य ठिकानों और सेना की गतिविधियों की जानकारी जुटाने तक ही सीमित नहीं रहा। नेटवर्क की नजर बड़े धार्मिक स्थलों पर भी थी। सूत्रों के अनुसार, जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से खाटू श्याम समेत अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के फोटो व वीडियो मिले हैं। इससे खुफिया एजेंसियों और पुलिस की चिंता बढ़ गई है।
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सूत्रों के अनुसार, बुधवार को आरोपियों से पूछताछ और मोबाइल सर्विलांस डाटा खंगालने पर पता चला कि उन्होंने खाटू श्याम मंदिर की लोकेशन, फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेजे थे। इसके अलावा हापुड़ से पकड़े गए एक अन्य आरोपी अजीम राणा के मोबाइल फोन में भी कई मंदिरों की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं।
आशंका जताई जा रही है कि धार्मिक स्थलों की रेकी कर भविष्य में किसी बड़ी साजिश की तैयारी की जा रही थी। इस खुलासे के बाद विभिन्न शहरों में चेकिंग और सत्यापन अभियान तेज कर दिए गए हैं।
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ऑनलाइन मिल रहा था प्रशिक्षण
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी प्रवीण और रितिक को ऑनलाइन तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा था। उन्हें सीसीटीवी कैमरे लगाने, उनका एक्सेस तैयार करने और डाटा विदेश भेजने के तरीके सिखाए जा रहे थे। पाकिस्तान में बैठा सरगना इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था और लगातार निगरानी रखे हुए था। सूत्रों के मुताबिक, उसने पकड़े गए आरोपियों को व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिये गाजियाबाद के दो दर्जन से अधिक लोगों को नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य भी दिया था। पुलिस कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।


जरूरत पर उधार लिया था, क्या पता था ऐसे फंस जाएंगे

मामले के खुलासे के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों से एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। ये सभी गिरफ्तार किए गए आरोपियों सुहैल मलिक, साने इराम उर्फ मेहक, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि, रितिक गंगवार और प्रवीण के संपर्क में रहे हैं। सीडीआर और बैंक खातों के लेनदेन के आधार पर इन्हें पूछताछ के लिए लाया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने जरूरत के समय मुख्य आरोपियों से पैसे उधार लिए थे, लेकिन वे जासूसी गतिविधियों में शामिल नहीं थे। उनका कहना है कि जरूरत पर उधार लिया था, क्या पता था ऐसे फंस जाएंगे। दूसरी ओर घरों से लोगों को उठाकर पूछताछ के लिए लाए जाने के बाद उनके परिजन पुलिस थानों, चौकियों और एसीपी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
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